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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - चलता रहा और मुस्कुराता रहा अकेला इस तरह मैं अपनी किस्मत आजमाता रहा जैसे भी जिंदगी में अच्छे बुरे दौर आये घबराया नहीं मस्ती में गुनगुनाता रहा मैं FHT   VI6t जो   भी IuT ले साथ गया मैं उसे भुलाता रहा जो भी छूट अपनी ही g7 # सदा रहा সলনা कोई मिलता रहा तो कोई छोड़ जाता रहा किसी से कोई हमदर्दी की उम्मीद ना की अपना बोझ मंजिल का खुद ही उठाता रहा चलता रहा और मुस्कुराता रहा अकेला इस तरह मैं अपनी किस्मत आजमाता रहा जैसे भी जिंदगी में अच्छे बुरे दौर आये घबराया नहीं मस्ती में गुनगुनाता रहा मैं FHT   VI6t जो   भी IuT ले साथ गया मैं उसे भुलाता रहा जो भी छूट अपनी ही g7 # सदा रहा সলনা कोई मिलता रहा तो कोई छोड़ जाता रहा किसी से कोई हमदर्दी की उम्मीद ना की अपना बोझ मंजिल का खुद ही उठाता रहा - ShareChat