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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - धूप-्छाँव का खेल है जीवन, हर पल नया सवेरा है, आज यहाँ जो रौशन है, कल वहाँ गहरा अँधेरा है। दौड़ रहे हैं सब मंज़िल को, सुकून कहीं पर खोया है, काट रहा है इंसान वही, जो उसने कल को बोया है। रिश्तों की कच्ची डोरी है, और ख़्वाहिशों का अंबार है, पर सच तो बस इतना है कि॰ ये सफर बस दो-चार दिन का उधार है। 4 मुस्कुराकर जीना सीख गम को गले लगाना छोड़ दे, मिट्टी का ये पुतला है, इसे घमंड से सजाना छोड़ दे। धूप-्छाँव का खेल है जीवन, हर पल नया सवेरा है, आज यहाँ जो रौशन है, कल वहाँ गहरा अँधेरा है। दौड़ रहे हैं सब मंज़िल को, सुकून कहीं पर खोया है, काट रहा है इंसान वही, जो उसने कल को बोया है। रिश्तों की कच्ची डोरी है, और ख़्वाहिशों का अंबार है, पर सच तो बस इतना है कि॰ ये सफर बस दो-चार दिन का उधार है। 4 मुस्कुराकर जीना सीख गम को गले लगाना छोड़ दे, मिट्टी का ये पुतला है, इसे घमंड से सजाना छोड़ दे। - ShareChat