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#Dhan satguru maharaj ji
Dhan satguru maharaj ji - मिली थी वो एक रब्बी नज़र फ़िर रही ना ख़ुद की खबर... जो पूर्ण सतगुरु के मार्गदर्शन में जीने का आनंद है, वो जीवन की किसी भी सुविधा और बैभव में नहीं है। दुनिया की हर खुशी क्षणिक होकर मिट जाती है, पर गुरु की शरण का सुख कभी कम नहीं होता। 1 जिसे मिल जाए सतगुरु की रहमत का सहारा , उसका जीवन सचमुच धन्य हो जाता है। हर साँस में नाम की महक समाने लगती है, और मन प्रभु-मिलन की राह पर चल पडता है। दौलत , शोहरत , ऐशो आराम सब फ़ीके पड़ जाते हैं का प्रेम हृदय में घर कर जाता है। जब सतगुरु में शुक्राना ही उभरता है लबों पर, फिर हर हाल और जीवन एक मधर डबादत बन ज्ाता है। मिली थी वो एक रब्बी नज़र फ़िर रही ना ख़ुद की खबर... जो पूर्ण सतगुरु के मार्गदर्शन में जीने का आनंद है, वो जीवन की किसी भी सुविधा और बैभव में नहीं है। दुनिया की हर खुशी क्षणिक होकर मिट जाती है, पर गुरु की शरण का सुख कभी कम नहीं होता। 1 जिसे मिल जाए सतगुरु की रहमत का सहारा , उसका जीवन सचमुच धन्य हो जाता है। हर साँस में नाम की महक समाने लगती है, और मन प्रभु-मिलन की राह पर चल पडता है। दौलत , शोहरत , ऐशो आराम सब फ़ीके पड़ जाते हैं का प्रेम हृदय में घर कर जाता है। जब सतगुरु में शुक्राना ही उभरता है लबों पर, फिर हर हाल और जीवन एक मधर डबादत बन ज्ाता है। - ShareChat