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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - पानी को बर्फ में॰ बदलने में वक्त लगता है !! ढले हुए सूरज को, निकलने में वक्त लगता है !! थोड़ा धीरज् रख थोड़ा और जोर लगाता रह !! किस्मत कै जंग लगे दरवाजे को, खुलने में वक्त लगता है !! कुछ देर रुकने के बाद फिर से चल पड़ना दोस्त !! हर ठोकर के बाद, संभलने सें वक्त लगनाा है !! बिखरेगी फिर वही चमक, तेरे वजूद से ढ्ू महसूस करना !! ইন্ং ঘন ক্ষী; थोड़ा वक्त लगता है !! संवरने जो तूने कहा, कर दिखायेगा रख यकीन !! गरजे जब बादल, तो बरसने में वक्त लगता है !! पानी को बर्फ में॰ बदलने में वक्त लगता है !! ढले हुए सूरज को, निकलने में वक्त लगता है !! थोड़ा धीरज् रख थोड़ा और जोर लगाता रह !! किस्मत कै जंग लगे दरवाजे को, खुलने में वक्त लगता है !! कुछ देर रुकने के बाद फिर से चल पड़ना दोस्त !! हर ठोकर के बाद, संभलने सें वक्त लगनाा है !! बिखरेगी फिर वही चमक, तेरे वजूद से ढ्ू महसूस करना !! ইন্ং ঘন ক্ষী; थोड़ा वक्त लगता है !! संवरने जो तूने कहा, कर दिखायेगा रख यकीन !! गरजे जब बादल, तो बरसने में वक्त लगता है !! - ShareChat