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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ हनुमान जी से सीखें
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - संत वेश का सम्मान कैसे करें? हनुमान जी से सीखें बाहरी आदर नहीं , केवल  संतों का सम्मान बल्कि दिल से जुड़ी सच्ची श्रद्धा है १. विनम्रता (नम्न स्वभाव) हनुमान जी अत्यंत शक्तिणाली होने के वावजुद हमेशा विनम्र रहे। सं्तों के प्रति भीह्में यही भाव যনা বাচিয और नम्ता।    २. सेवा भाव हनुमान जी ने॰श्री राम की নিষোথ মনা কীI মনা কী মনা মচামনা সায  বনকী आवश्यकताओं का ध्यान रखना सम्मान का सच्चा रूम ह ३. पहचान की समझ (विवेक) वेश धारण करने वाला सच्चा हर संत  संत हो॰ यह जरूरी नहीं। इसलिए सम्मान करते हए भी विवेक और समझदारी रखना आवश्यक है। ४. अहंकार से दूर रहना रंर्तों का सम्गान करते समय मन गें अहंकार नहीं होना चाहिए। सच्चा वही हैजो दिल सेहो,   दिखावे के लिए नहीं। 66 संतों की वाणी अमुत के समान होती है, अच्छे गुण अपनाना " ওলকা মম্সান কহন ম তীবল ম মনী কা সমলী মম্সান নম চীনা ` जव हम उनके बताए मार्गन शांति, सुख और का विकास होता है। ९९ सत्य মনযুতী  भक्ति. संयम ओर सदाचार  अपने जीवन अपनाते हं संक्षेप में प्रणाम करने से नहीं করথল संत वेश का सम्मान को समझकर और अपनाकर होता है। बल्कि उनके যুতাী  हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि सच्चा सम्मान विनम्रता , सेवा , विवेक और सच्ची श्रद्धा में है। आओ , हम सब संतों का सम्मान करें और उनके बताए श्रेष्ठ मार्ग पर चलें | संत वेश का सम्मान कैसे करें? हनुमान जी से सीखें बाहरी आदर नहीं , केवल  संतों का सम्मान बल्कि दिल से जुड़ी सच्ची श्रद्धा है १. विनम्रता (नम्न स्वभाव) हनुमान जी अत्यंत शक्तिणाली होने के वावजुद हमेशा विनम्र रहे। सं्तों के प्रति भीह्में यही भाव যনা বাচিয और नम्ता।    २. सेवा भाव हनुमान जी ने॰श्री राम की নিষোথ মনা কীI মনা কী মনা মচামনা সায  বনকী आवश्यकताओं का ध्यान रखना सम्मान का सच्चा रूम ह ३. पहचान की समझ (विवेक) वेश धारण करने वाला सच्चा हर संत  संत हो॰ यह जरूरी नहीं। इसलिए सम्मान करते हए भी विवेक और समझदारी रखना आवश्यक है। ४. अहंकार से दूर रहना रंर्तों का सम्गान करते समय मन गें अहंकार नहीं होना चाहिए। सच्चा वही हैजो दिल सेहो,   दिखावे के लिए नहीं। 66 संतों की वाणी अमुत के समान होती है, अच्छे गुण अपनाना " ওলকা মম্সান কহন ম তীবল ম মনী কা সমলী মম্সান নম চীনা ` जव हम उनके बताए मार्गन शांति, सुख और का विकास होता है। ९९ सत्य মনযুতী  भक्ति. संयम ओर सदाचार  अपने जीवन अपनाते हं संक्षेप में प्रणाम करने से नहीं করথল संत वेश का सम्मान को समझकर और अपनाकर होता है। बल्कि उनके যুতাী  हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि सच्चा सम्मान विनम्रता , सेवा , विवेक और सच्ची श्रद्धा में है। आओ , हम सब संतों का सम्मान करें और उनके बताए श्रेष्ठ मार्ग पर चलें | - ShareChat