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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - जिस तरह चढ़ता है, उसी तरह उतरता है। लिए कौन ठहरता है। चोटियों पर सदा के बहोत ग़ुरूर न कर अपनेआप पे ऐ दोस्त, मिट्टी का खिलौना है, टूटकर बिखरता है। हर हाल में ख़ुश रहता हूँ बस ये सोचकर वक़्त जैसा भी हो, एक মুড়বনা ট1 रोज़ ख़ौफ़ नहीं मुझको दरिया की गहराई से हुनर हो वो उभरता है। 4٩ डूबने का हालात से लड़ता रहूँगा तबतक ' तनहा , जबतक बिगड़ा मुक़द्दर नहीं सँवरता है। जिस तरह चढ़ता है, उसी तरह उतरता है। लिए कौन ठहरता है। चोटियों पर सदा के बहोत ग़ुरूर न कर अपनेआप पे ऐ दोस्त, मिट्टी का खिलौना है, टूटकर बिखरता है। हर हाल में ख़ुश रहता हूँ बस ये सोचकर वक़्त जैसा भी हो, एक মুড়বনা ট1 रोज़ ख़ौफ़ नहीं मुझको दरिया की गहराई से हुनर हो वो उभरता है। 4٩ डूबने का हालात से लड़ता रहूँगा तबतक ' तनहा , जबतक बिगड़ा मुक़द्दर नहीं सँवरता है। - ShareChat