उसकी शादी वाली रात में बाहर निकलते वक्त एक बार भी पीछे नहीं देखा डर था अगर मैंने उसे एक पल भी देखा या कॉल करने की कोशिश की तो शायद खुद को रोक नहीं पाऊंगा रात बहुत ठंड थी चारों तरफ सन्नाटा था अकेला बाहर बैठा था किसी से बिना कुछ बताए अकेले एक जगह बैठ कर बीते हुए कल को याद करके कभी-कभी आंखें नम हो जाती थी वो चेहरा वो यादें वो बातें सब मेरे नजरों के सामने घूम रहे थे कानों में आवाजें गूंज रही थी मेरी दुनिया वीरान हो रही थी जैसे कोई हमसे कह रहा था ये सब एक सपना है सुबह सब ठीक हो जाएगा लेकिन वो सपना नहीं हकीकत था खुद को सम्भालने की कोशिश कर रहा था उस कड़ाके की ठंड की रात ऐसी बीत गई पता ही नहीं चला सड़क खाली थी और उस रात में पहली बार समझा इंसान बाहर से कितना भी स्ट्रांग दिखे अंदर से बिखर कर भी चल सकता है उसके जाने के बाद मैंने जिंदगी को नॉर्मल बनाने की बहुत कोशिश कि काम लंबा कर दिया नए लोगों से मिला कभी-कभी तो हंसा भी पर वो हंसी मेरी नहीं होती थी दिल में उसकी यादें अभी भी जिंदा थी बिल्कुल चुप बिल्कुल शांत जैसे कोई पुरानी आदत जो छोड़ने पर भी नहीं छूटती फिर जैसे किसी ने धीरे से कह दिया हो तुम अब उसकी कहानी का हिस्सा नहीं हो मैं उससे कभी नहीं बता पाया की उसकी हर छोटी बात रात के 2 बजे की कॉल्स उसकी थकावट भरी आवाज उसके रोते हुए रुक-रुक कर बोलने वाले शब्द सब मेरे अंदर कच्चे धागों की तरह बंध गए थे पर मैं चूप रहा हमेशा की तरह उसके चेहरे पर वो मुस्कान जिसके लिए मैं कभी दुआ करता था मैं जा सकता था |
एक सिंपल "हाँ" बोल सकता था पर पता नहीं क्यों हिम्मत नहीं हए उसके पास जाने की शायद इसलिए क्योंकि कुछ लोग हमारी जिंदगी में हमेशा के लिए नहीं आते बस एक बार आते हैं और हमें वो बना जाते हैं जो हम कभी थे ही नहीं मेैं वहाँ से निकल गया चुपचाप और तब समझा प्यार हमेशा पाना नहीं होता कभी-कभी सिर्फ छुपकर उनके लिए खुश हो जाना होता है आज भी जब जिंदगी थोड़ी शांत होती है मैं उसका नाम अपने दिमाग में धीरे से बोलता हूँ बस एक बार फिर चुप हो जाता हूं कुछ कहानियां वापस नहीं आती पर उनकी यादें वो कभी कहीं नहीं जाती अपना दुःख अपना दर्द अपनी पीड़ा किसी को बता नहीं पाता था जिसके साथ पूरी जिंदगी बिताने के सपने देखे हों वही इंसान जब जिंदगी से चला जाता है तो बहुत तकलीफ होती है मैं उस तकलीफ को उस दर्द अपनी खामोशियों में छुपा रखा था शायद इस लिए किसी को पता न चले उस दर्द से बाहर निकलना इतना आसान भी नहीं है जिंदगी संग बिताने के बहुत सारे उपाय सोचे थे लेकिन बिछड़ने के बाद जीने का उपाय नहीं सोचा था शायद इसी वजह जिंदगी इतनी तकलीफ में गुजर रही है किसी को बता नहीं पाते इसका मतलब ये थोड़ी है जिंदगी में कोई तकलीफ नहीं है जिंदगी जीने की चाह खत्म हो गई बाहर से हंसता हुआ इंसान अंदर से बिल्कुल टूट चुका होता है सबके के सामने बात करके अक्सर तन्हाई में खामोश रहता है |
बिछड़ने के दिन से मैंने आपको और चाहा है...
ठीक उसी तरह, जैसे...
किसी की मृत्यु निकट हो और जीने की चाह बढ़ जाए ।❤️
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#HAK
नदीम खान✍️
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