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#☝रहीम की सीख🌟 ✨ रहीम दास जी का यह अद्भुत दोहा हमें जीवन की सबसे बड़ी सीख देता है। ✨ तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम परकाज हित, संपति संचहिं सुजान॥ अर्थ: प्रकृति हमें सिखाती है कि परोपकार ही जीवन का असली धर्म है। जिस तरह वृक्ष अपने फल खुद नहीं खाते और नदियाँ अपना पानी खुद नहीं पीतीं, उसी तरह सच्चे और अच्छे इंसान अपनी धन-संपत्ति का उपयोग दूसरों की मदद और भलाई के लिए करते हैं। 🌿 आइए आज हम भी अपने जीवन में थोड़ा परोपकार शामिल करें। 🌿 #Shayari #Suvichar #RahimKeDohe #AnmolVachan #DailyInspiration #ShareChat #trending #viral #viralvideo
☝रहीम की सीख🌟 - तरुवर फल नहिं खात है सखर पियहिं न पान। कहि रहीम परकाज हित, संपति संचहिं सुजान ।I कहि रहीम परकाज हित, संचति संवहिं सुजान।l 3থ वृक्ष कभी अपने फल खुद नहीं खाते और नदियाँ ( सरोवर ) कभी अपना पानी खुद नहीं पीतीं | इसी तरह, जो सज्जन और अच्छे लोग होते हैं, वे अपनी संपत्ति का संचय (इकट्ठा ) की भलाई दूसरों : (परोपकार ) के लिए करते हैं। तरुवर फल नहिं खात है सखर पियहिं न पान। कहि रहीम परकाज हित, संपति संचहिं सुजान ।I कहि रहीम परकाज हित, संचति संवहिं सुजान।l 3থ वृक्ष कभी अपने फल खुद नहीं खाते और नदियाँ ( सरोवर ) कभी अपना पानी खुद नहीं पीतीं | इसी तरह, जो सज्जन और अच्छे लोग होते हैं, वे अपनी संपत्ति का संचय (इकट्ठा ) की भलाई दूसरों : (परोपकार ) के लिए करते हैं। - ShareChat