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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - इंतज़ार है तेरा मगर तू आना मत आये भी तो मुझे गले से लगाना मत तेरे आने से अब कुछ नहीं बदलेगा इन आँखों को और रुलाना मत तुझे गले लगाने का मन मेरा भी बहुत है और तुझसे दूर रहना आज भी मुश्किल बहुत है एक ही गुज़ारिश है अब तुझसे बस तू आ सके तो भी मेरे पास आना मत तेरे इंतज़ार में मैंने जीना सीख लिया है अब दोबारा इन ज़ख़्मों पे नमक लगाना मत इंतज़ार है तेरा मगर तू आना मत आये भी तो मुझे गले से लगाना मत तेरे आने से अब कुछ नहीं बदलेगा इन आँखों को और रुलाना मत तुझे गले लगाने का मन मेरा भी बहुत है और तुझसे दूर रहना आज भी मुश्किल बहुत है एक ही गुज़ारिश है अब तुझसे बस तू आ सके तो भी मेरे पास आना मत तेरे इंतज़ार में मैंने जीना सीख लिया है अब दोबारा इन ज़ख़्मों पे नमक लगाना मत - ShareChat