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#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #व्हाट्सएप्प स्टेटस #❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #🙏शाम की आरती🪔 #🌜 शुभ संध्या🙏
सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है - कोलफील्ड मिरर ٢٢٥ a JUPTER ad   40 433 w Vಕun04೯Q2026 0ರ-ಗ -001oo लिए सब सन्तों ने मुक्ति-मोक्ष के आदि नाम को ही बताया है, वो हैं पाँच नाम और उन नामों में कभी कोई परिवर्तन नहीं हुआ आदि नाम को सन्त नामदान के वक्त সলযা-গলয মনি ননা লিব গল- बताते हैं और वह गुप्त जपा जाता है अलग धर्म स्थापित कर लिए मत का कोलफील्ड मिरर ०४ जून (सोलन  मतांतर बना लिए। जबकि पहले एक ही हिमाचल प्रदेश)ः परम पूज्य परम सन्त धर्म था॰ एक ही भाषा थीः संस्कृत भाषा  लेकिन अब बहुत सी भाषाएं हो गई।  बाबा उमाकान्त जी महाराज ने ३१ मई 2026 কী মনমযা স কম্া কি মমা স पहले तो केवल मानव जाति ही थी। मानव बहुत नाम हैं। यह सृष्टि क्या आज की है?  किसको कहते हैं?  धर्म जाति या मानव यह तो लाखों वर्ष है। कितनी बार सत्य अहिसा परोपकार ओर सेवा यही Hி यह सतयुग त्रेता और द्वापर बीत गए और  है धर्म। पहले लोग सत्यवादी होते थे हर समय कोई न कोई महात्मा आए हैं।  हिंसा हत्या नहीं करते थे उनके अंदर किसी ने उस प्रभु को दीन बंधू कहा परोपकार और सेवा भाव होता था। किसी ने दीना नाथ कहा किसी ने ज्योति लेकिन अब यह सब खत्म होता चला जा नारायण कहा किसी ने कुछ कहा किसी  रहा है। लोगों के कर्म खराब होते चले जा  कहे तब भव से तरे।" ने कुछ " कहा। अब उन्हीं के उस नाम का कहा है॰ "पंच शब्द निज मंगल गाना " रहे हैं। आप यह समझो कि धर्म एक ही है "गुरु घर में घर दिखलावे धुन  प्रचार हो गया ओर वही नाम लोग बता कहा हे ओर वह आदि नाम पोँच नाम भी वही हें उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ। वह नाम  देते हैं। सन्तों ने पाँच नाम बताए लेकिन शब्द पांच बतलावे" अब उन्हीं की गद्दी पर बैठे हुए लोग  सन्त तो ये कह कर के गए लेकिन शुरुआत से ही चला आ रहा है और आदि कहते हैं कि एक नाम से काम हो जायेगा  उन्हीं की बातों को वे काट रहे हैं। कहते से अन्त तक वही नाम रहेगा। जिस नाम तुम्हारा। कोई दो नाम बताता, कोई तीन  हैं दो नाम से॰ एक नाम से उद्धार होगा ক লিব কম্া नाम बताता| जबकि सन्त जो थे जिन्होंने "कोटि नाम संसार में ताते मुक्ति न होय ऐसा होगा, वैसा होगा। তী যুদ  आदि नाम शुरुआत से वही चला आ उन नामी को देखा उनका दर्शन किया आदि नाम जप बिरला समझे ओर आदि नाम को बताया जो कि पाँच रहा हे ओर अन्त तक भी वही रहेगा। कोई। " नाम हें। इस समय पर कोटि यानी करोड़ो़ और इस नाम को सन्त नामदान के वक्त कहा हैे, "पांच नाम का सुमिरन करे सन्त बताते हे। नाम हो गए। अलग ्अलग मठ बना लिए कोलफील्ड मिरर ٢٢٥ a JUPTER ad   40 433 w Vಕun04೯Q2026 0ರ-ಗ -001oo लिए सब सन्तों ने मुक्ति-मोक्ष के आदि नाम को ही बताया है, वो हैं पाँच नाम और उन नामों में कभी कोई परिवर्तन नहीं हुआ आदि नाम को सन्त नामदान के वक्त সলযা-গলয মনি ননা লিব গল- बताते हैं और वह गुप्त जपा जाता है अलग धर्म स्थापित कर लिए मत का कोलफील्ड मिरर ०४ जून (सोलन  मतांतर बना लिए। जबकि पहले एक ही हिमाचल प्रदेश)ः परम पूज्य परम सन्त धर्म था॰ एक ही भाषा थीः संस्कृत भाषा  लेकिन अब बहुत सी भाषाएं हो गई।  बाबा उमाकान्त जी महाराज ने ३१ मई 2026 কী মনমযা স কম্া কি মমা স पहले तो केवल मानव जाति ही थी। मानव बहुत नाम हैं। यह सृष्टि क्या आज की है?  किसको कहते हैं?  धर्म जाति या मानव यह तो लाखों वर्ष है। कितनी बार सत्य अहिसा परोपकार ओर सेवा यही Hி यह सतयुग त्रेता और द्वापर बीत गए और  है धर्म। पहले लोग सत्यवादी होते थे हर समय कोई न कोई महात्मा आए हैं।  हिंसा हत्या नहीं करते थे उनके अंदर किसी ने उस प्रभु को दीन बंधू कहा परोपकार और सेवा भाव होता था। किसी ने दीना नाथ कहा किसी ने ज्योति लेकिन अब यह सब खत्म होता चला जा नारायण कहा किसी ने कुछ कहा किसी  रहा है। लोगों के कर्म खराब होते चले जा  कहे तब भव से तरे।" ने कुछ " कहा। अब उन्हीं के उस नाम का कहा है॰ "पंच शब्द निज मंगल गाना " रहे हैं। आप यह समझो कि धर्म एक ही है "गुरु घर में घर दिखलावे धुन  प्रचार हो गया ओर वही नाम लोग बता कहा हे ओर वह आदि नाम पोँच नाम भी वही हें उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ। वह नाम  देते हैं। सन्तों ने पाँच नाम बताए लेकिन शब्द पांच बतलावे" अब उन्हीं की गद्दी पर बैठे हुए लोग  सन्त तो ये कह कर के गए लेकिन शुरुआत से ही चला आ रहा है और आदि कहते हैं कि एक नाम से काम हो जायेगा  उन्हीं की बातों को वे काट रहे हैं। कहते से अन्त तक वही नाम रहेगा। जिस नाम तुम्हारा। कोई दो नाम बताता, कोई तीन  हैं दो नाम से॰ एक नाम से उद्धार होगा ক লিব কম্া नाम बताता| जबकि सन्त जो थे जिन्होंने "कोटि नाम संसार में ताते मुक्ति न होय ऐसा होगा, वैसा होगा। তী যুদ  आदि नाम शुरुआत से वही चला आ उन नामी को देखा उनका दर्शन किया आदि नाम जप बिरला समझे ओर आदि नाम को बताया जो कि पाँच रहा हे ओर अन्त तक भी वही रहेगा। कोई। " नाम हें। इस समय पर कोटि यानी करोड़ो़ और इस नाम को सन्त नामदान के वक्त कहा हैे, "पांच नाम का सुमिरन करे सन्त बताते हे। नाम हो गए। अलग ्अलग मठ बना लिए - ShareChat