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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #🥰Express Emotion #🌸 सत्य वचन
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी, थी नफरत भी तुम्हारी ' हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किससे माँगते वो शहर भी तुम्हारा था, वो अदालत भी थी। तुम्हारी वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी, थी नफरत भी तुम्हारी ' हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किससे माँगते वो शहर भी तुम्हारा था, वो अदालत भी थी। तुम्हारी - ShareChat