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#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - गुजर जाएगा ये दौर भी ग़ालिब इत्मीनान तो रख.. তাযা ही नहीं ठहरी तो ri তাল ग़म की क्या औकात.... ! ! मिर्ज़ा ग़ालिब : साहित्य दर्पण = गुजर जाएगा ये दौर भी ग़ालिब इत्मीनान तो रख.. তাযা ही नहीं ठहरी तो ri তাল ग़म की क्या औकात.... ! ! मिर्ज़ा ग़ालिब : साहित्य दर्पण = - ShareChat