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#☆࿐ཽ༵༆༒जय महाकाल༒༆࿐ཽ༵☆
☆࿐ཽ༵༆༒जय महाकाल༒༆࿐ཽ༵☆ - भाने लगी है तेरे दरकी गलियाँ तुम्हारें दरश से खिले मन की कलियाँ , दीदार तेरा यूँ ही पाता रहूँ 37 4/4[. तू उज्जैन बुलाता रहें और मैं आता रहूँ भाने लगी है तेरे दरकी गलियाँ तुम्हारें दरश से खिले मन की कलियाँ , दीदार तेरा यूँ ही पाता रहूँ 37 4/4[. तू उज्जैन बुलाता रहें और मैं आता रहूँ - ShareChat