।। मेरे विचार।।
।। आज हर इंसान दुखी है
और सबसे ज्यादा दुखी है मां-बाप
।। इसका कारण है मां-बाप के नालायक बच्चे
हर मां-बाप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा रोटी कपड़ा मकान सब कुछ देता है और संस्कार भी देता है
।। पर एक कहावत है ना कि बच्चे जब आप का जूता पहनने लगे और उसको जूता परफेक्ट आने लगे तो कहावत में कहा जाता है कि आप के बराबर बेटा हो जाता है और बाप बेटे का रिश्ता बाप बेटे का रिश्ता नहीं रह जाता बल्कि एक दोस्त के जैसा दोस्त बन जाते हैं
।। पर कहानी का मोड यहीं से शुरुआत होता है आप का जूता बेटे के पैर में आने लगता है और आप के कंधे से कंधे मिला भी लेता है पर होता है उल्टा
।। अब आपको वह बाप नहीं दोस्त भी नहीं अब आपको वह अपने रास्ते का सबसे बड़ा कांटा समझने लगता है क्योंकि पिता है अपने बच्चों को हमेशा अच्छी शिक्षा और अच्छी रास्ते पर चलने के लिए कहता है और यही बात बार-बार दोहराता है
।। परिणाम परिणाम यह होता है कि बच्चा जब घर से बाहर निकलता है तो उसके दोस्त अच्छे दोस्त नहीं बनते हमेशा गलत रास्ते पर चलने वाले ही दोस्त लड़के का दोस्त बनते हैं
और वह लड़का अपने मां बाप की दी हुई शिक्षा का महत्व भूल जाता है और अपने लफंगे दोस्तों के बातों में आकर हर वह काम करता है जो उसे नहीं करना चाहिए इस उम्र में
दारू पीना सिगरेट पीना गुटखा खाना लड़कियों को छेड़ना गलत रास्ते पर चलना और रही बात जब आप उसे नहीं करने को कहता है कि बेटा पढ़ाई पर ध्यान दें यह सब अच्छी चीज नहीं है तुम्हारा करियर खराब हो जाएगा लोग क्या कहेंगे
।। तब बच्चे को लगता है कि यह मेरा बाप नहीं यह तो मेरा दुश्मन है हर कोई मेरी तारीफ करता है लेकिन पिता है जो तारीफ के जगह में हमेशा नसीहत देता है वह भी लोगों के सामने खासकर मां के सामने और मां बेटे का रिश्ता तो करने के बाद ही खत्म होता है और लड़की को बिगड़ने में सबसे बड़ा हाथ मां का प्यार होता है
।। मां बोलेगी आप से की बच्चा सही नहीं कर रहा है आप बोलो उसे दांतों से लेकिन जब आप बोलेंगे तो वही बीच में आकर खड़ा हो जाएंगे जिससे बच्चे का हिम्मत और बढ़ जाता है इसके बाद पति-पत्नी में भी अनुबंध होने लगता है पति हमेशा कहता है तुम अपने लाड प्यार से बच्चे को बिगाड़ रही है लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता आप जाता है हमेशा बेटा मेरा अच्छे रास्ते पर चले अपने खानदान का नाम रोशन करें देश का नाम रोशन करें समाज में उसकी इज्जत बड़े पर इन सब बातों को कोई फर्क नहीं पड़ता बच्चे पर और वह बच्चा आप को दुश्मन ही मान लेता है
आप ज्यादा बोलता नहीं वह अंदर ही अंदर कुत्ता है खून के आंसू रोता है पर दिखता नहीं और दिखता भी नहीं किसी को
आप कितने बड़े इंसान हो कितने महान हो समझ में आपकी क्या इज्जत है लोग आपको किस रूप में जानते हैं किस रूप में आपका पहचान है यह सब समाज आपको नहीं बताता है क्योंकि समाज के पास टाइम नहीं है समाज आईना है सीख देने के लिए आपकी औकात तो आपकी औलाद ही दिखता है जब वह आपकी आंखों में आंखें डालकर आपकी हर बात का जवाब देता है वह इज्जत नहीं कोई मान सम्मान नहीं आपकी बातों को अपने जूते के नोक पर रखता है दोस्त तारों में कहता है क्या कर लेगा पिता मुझे कुछ नहीं कर पाएंगे वह क्योंकि वह जानता है कि आप मन से भी ज्यादा मुझे प्यार करता है इस बात का उसे एहसास है और यही बात का वह फायदा उठाता है लाचार बाप बेटे को पूछने का पता और यह अंदर ही अंदर घुट घुट के एक दिन मर भी जाता है उसके बाद की कहानी तो आप लोगों को पता ही होगा क्योंकि जितने लोग यह पढ़े होंगे कुछ ना कुछ तो हर इंसान के जीवन में तो बीता ही होगा
।। हम जैसे बाप नहीं चाहते हैं कि हमारा बेटा राम जैसा ही हमें मिले हम बाप यह भी नहीं चाहते कि हमारा बेटा भरत जैसा मिले हम बाप यह भी नहीं चाहते कि हमारा बेटा सरवन कुमार जैसा मिले हम बाप का बस एक ही ख्वाहिश रहता है की बेटा हो बेटी की तरह ही मिले बस अपने बाप का थोड़ा सा रिस्पेक्ट इज्जत उनकी बातों को सम्मान दे आज का पिता के लिए इतना ही काफी है
दिलीप कुमार सिंह
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