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#☝आज का ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख सैनी बॉय _ K . S _ *राम राम जी*🙏🏻
☝आज का ज्ञान - कभी गौर किया हैं कि बुजुर्ग लोग घंटों एक ही जगह चुपचाप कैसे बैठे रहते हैं? ना हाथ में   phone, না ক্ষীৎ ना किसी चीज़ की जल्दबाज़ी| फिर भी social media, वो बेचैन नहीं होते। शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने जिंदगी को हमारे जैसे भागकर नहीं, ठहरकर जिया हैं लोग कहते हैं उम्र बढ़ने के बाद इंसान बदल जाता हैं लेकिन ये हैं कि वो बदलते नहीं , নস ৪ীী২-৪ীী২ सच अकेले पड़ जाते हैं। हम अपनी दुनिया, अपने   काम , और अपनी दौड़ में इतने उलझ जाते हैं अपने phones कि पीछे मुड़कर देखना ही भूल जाते हैं। कभी उनके पास बैठकर देखो। शुरुआत में लगेगा कि उनकी बातें खत्म ही नहीं होतीं| वो किस्से पुराने স্রুনাঠৌ , लोग याद करेंगे, वही बातें बार-बार  दोहराएंगे | पुराने क्योंकि उनके पास यादें बहुत हैं॰॰॰ बस सुनने वाला कोई नहीं | उन कुछ मिनटों की बातचीत में  उनके 3ীয যক্ীন মানী, चेहरे पर जो आती हैं ना, वो किसी बड़ी चीज़ से खुशी नहीं मिल सकती| ऐसा लगता है जैसे उन्होंने अपना गुज़रा हुआ वक्त थोड़ी देर के लिए फिर से जी लिया हो। पेड़ों   जैसे लगते हैं चुप, मजबूत शायद   इसलिए बुजुर्ग और धैर्य से भरे हुए। उन्होंने आंधियाँ भी देखी हैं और पतझड़ भी॰ फिर भी खड़े हैं। तो कभी वक्त मिले, उनके पास बैठ जाना। क्योंकि एक दिन वक्त हमारे पास लेकिन शायद तब भी॰होगा वाला कोई और होगा सुनने कभी गौर किया हैं कि बुजुर्ग लोग घंटों एक ही जगह चुपचाप कैसे बैठे रहते हैं? ना हाथ में   phone, না ক্ষীৎ ना किसी चीज़ की जल्दबाज़ी| फिर भी social media, वो बेचैन नहीं होते। शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने जिंदगी को हमारे जैसे भागकर नहीं, ठहरकर जिया हैं लोग कहते हैं उम्र बढ़ने के बाद इंसान बदल जाता हैं लेकिन ये हैं कि वो बदलते नहीं , নস ৪ীী২-৪ীী২ सच अकेले पड़ जाते हैं। हम अपनी दुनिया, अपने   काम , और अपनी दौड़ में इतने उलझ जाते हैं अपने phones कि पीछे मुड़कर देखना ही भूल जाते हैं। कभी उनके पास बैठकर देखो। शुरुआत में लगेगा कि उनकी बातें खत्म ही नहीं होतीं| वो किस्से पुराने স্রুনাঠৌ , लोग याद करेंगे, वही बातें बार-बार  दोहराएंगे | पुराने क्योंकि उनके पास यादें बहुत हैं॰॰॰ बस सुनने वाला कोई नहीं | उन कुछ मिनटों की बातचीत में  उनके 3ীয যক্ীন মানী, चेहरे पर जो आती हैं ना, वो किसी बड़ी चीज़ से खुशी नहीं मिल सकती| ऐसा लगता है जैसे उन्होंने अपना गुज़रा हुआ वक्त थोड़ी देर के लिए फिर से जी लिया हो। पेड़ों   जैसे लगते हैं चुप, मजबूत शायद   इसलिए बुजुर्ग और धैर्य से भरे हुए। उन्होंने आंधियाँ भी देखी हैं और पतझड़ भी॰ फिर भी खड़े हैं। तो कभी वक्त मिले, उनके पास बैठ जाना। क्योंकि एक दिन वक्त हमारे पास लेकिन शायद तब भी॰होगा वाला कोई और होगा सुनने - ShareChat