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#☝ मेरे विचार #🌸 सत्य वचन #उर्दू शायर वसीम बरेलवी
☝ मेरे विचार - ८८ वो मेरे घर नहीं आता , मैं उस के घर नहीं जाता| मगर इन एहतियातों से तअ ल्लुक़ मर नहीं जाता ।  बुरे अच्छे हों जैसे भी हों, सब रिश्ते यहीं के हैं, किसी को साथ दुनिया से कोई ले कर नहीं जाता।  खुले थे शहर में सौ दर , मगर इक हद के अंदर ही, कहाँ जाता अगर मैं लौट के फिर घर नहीं जाता | वसीम बरेलवी * साहित्य सागर ८८ वो मेरे घर नहीं आता , मैं उस के घर नहीं जाता| मगर इन एहतियातों से तअ ल्लुक़ मर नहीं जाता ।  बुरे अच्छे हों जैसे भी हों, सब रिश्ते यहीं के हैं, किसी को साथ दुनिया से कोई ले कर नहीं जाता।  खुले थे शहर में सौ दर , मगर इक हद के अंदर ही, कहाँ जाता अगर मैं लौट के फिर घर नहीं जाता | वसीम बरेलवी * साहित्य सागर - ShareChat