बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
डॉक्टर को लोग अक्सर “भगवान” कह देते हैं, जबकि इस्लाम हमें सिखाता है कि शिफ़ा देने वाली ज़ात सिर्फ़ अल्लाह तआला की है, और डॉक्टर सिर्फ़ ज़रिया बनते हैं। लेकिन कुछ लोग अपने अख़लाक, सादगी और खिदमत के जज़्बे से दिलों में खास जगह बना लेते हैं। डॉक्टर इकराज़ अहमद साहब भी उन्हीं में से एक हैं — शालीन स्वभाव, नर्म लहजा और अपने काम के प्रति पूरी जिम्मेदारी के साथ।
दुनिया का उसूल है कि इंसान सबको खुश नहीं कर सकता। लोग तो अंबिया-ए-किराम तक से संतुष्ट नहीं हुए, फिर एक डॉक्टर से हर हाल में मुकम्मल नतीजे की उम्मीद करना कहाँ तक सही है। अल्लाह तआला कभी-कभी इंसान को आज़माता भी है — किसी को कमी देकर, किसी को नेमत देकर। लेकिन हम अक्सर नेमत मिलने पर शुक्र कम करते हैं और छोटी सी परेशानी पर शिकायत ज़्यादा करने लगते हैं।
हक़ीक़त यह है कि कोई भी डॉक्टर जानबूझकर अपने मरीज का नुकसान नहीं करता। वह अपनी पूरी मेहनत और इल्म से इलाज करता है, बाकी शिफ़ा अल्लाह के हुक्म से ही मिलती है।
हमने अपनी भाभी गुलशन बानो का पित्त की पथरी का ऑपरेशन डॉक्टर इकराज़ अहमद साहब से करवाया। केस जोखिम भरा था, क्योंकि पहले 2012 में डायलिसिस की नौबत आ चुकी थी और गुर्दे में पानी की समस्या भी रही थी। ऐसे में जयपुर ले जाने का इरादा था, लेकिन डॉक्टर साहब ने तवक्कुल के साथ जिम्मेदारी ली और अपैक्स स्काई लाइन हॉस्पिटल झुंझुनूं में अल्हम्दुलिल्लाह ऑपरेशन कामयाब रहा।
ऐसे मुश्किल मामलों में जब सब ठीक हो जाए तो कोई याद नहीं रखता, लेकिन अगर थोड़ी सी भी परेशानी हो जाए तो इल्ज़ाम देने में देर नहीं लगती।
डॉक्टर इकराज़ अहमद साहब की सादगी, मरीज के साथ हमदर्दी और खिदमत का जज़्बा काबिल-ए-तारीफ है।
अल्लाह तआला से दुआ है कि आपको सेहत, इज़्ज़त और कामयाबी में और बरकत अता फरमाए, और आपको यूँ ही लोगों के लिए खैर का ज़रिया बनाए।
जज़ाकल्लाहु ख़ैरन — इतने मुहब्बत और जिम्मेदारी से खिदमत करने के लिए। 🌹
*जावेद कुरेशी समाज़ सेवक वार्ड नं 24 झुंझुनूं*
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