ShareChat
click to see wallet page
search
#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं जाहि न चाहिअ कबहुँ कछु तुम्ह सन सहज सनेहु बसहु निरंतर तासु मन सो राउर निज गेहु भगवान श्री राम से वाल्मीकि जी कहते हैं कि जिसको कभी कुछ भी नहीं चाहिए और जिसका आपसे स्वाभाविक प्रेम है, आप उसके मन में निरंतर निवास कीजिए॰ वह आपका अपना घर है अर्थात ईश्वर को ढूँढने लिए पहाड़ों या जंगलों में जाने की आवश्यकता नहीं है यदि हम چ भीतर से लालच को हटा दें और निस्वार्थ प्रेम को जगा लें॰ तो अपने हमारा हृदय ही साक्षात् परमेश्वर का निवास स्थान बन जाता है। हरि शरणं जाहि न चाहिअ कबहुँ कछु तुम्ह सन सहज सनेहु बसहु निरंतर तासु मन सो राउर निज गेहु भगवान श्री राम से वाल्मीकि जी कहते हैं कि जिसको कभी कुछ भी नहीं चाहिए और जिसका आपसे स्वाभाविक प्रेम है, आप उसके मन में निरंतर निवास कीजिए॰ वह आपका अपना घर है अर्थात ईश्वर को ढूँढने लिए पहाड़ों या जंगलों में जाने की आवश्यकता नहीं है यदि हम چ भीतर से लालच को हटा दें और निस्वार्थ प्रेम को जगा लें॰ तो अपने हमारा हृदय ही साक्षात् परमेश्वर का निवास स्थान बन जाता है। - ShareChat