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#😞बेवफा शायरी
😞बेवफा शायरी - आज लिखने का बड़ा मन है, पर क्या लिखूं. बीते लम्हों की सच्चाई लिखूं या आने वाले ख्वाबों की परछाई लिखूं या फिर सब कुछ समेटकर लिखूं. . खुद को ही एकः कहानी कभी जो अधूरा रह गया, उसे पूरा लिखूं याजो कभी कैहा ही नहीं, उसे खुलकर लिखूं लिखू इन खामोशियों का हिसाब या दिल में छुपे हर अहसास को बैनकाब लिखूं॰ Rg বরন কী বাল या हालातों का जाल लिखूं कभी खुद से हुई लड़ाई लिखूं या हार के बादॅ मिली सच्चाई लिखूं. . जो खो गया उसका अफसोस लिखूं याजो बूचा है, उसमें भी कोई रोशनी लिखूं टूटकर फिर से जुड़ने की बात लिखूं बिखरकर भी मुस्कुराने की औकात लिखूं . या आज लिखने का बड़ा मन है, पर क्या लिखूं. बीते लम्हों की सच्चाई लिखूं या आने वाले ख्वाबों की परछाई लिखूं या फिर सब कुछ समेटकर लिखूं. . खुद को ही एकः कहानी कभी जो अधूरा रह गया, उसे पूरा लिखूं याजो कभी कैहा ही नहीं, उसे खुलकर लिखूं लिखू इन खामोशियों का हिसाब या दिल में छुपे हर अहसास को बैनकाब लिखूं॰ Rg বরন কী বাল या हालातों का जाल लिखूं कभी खुद से हुई लड़ाई लिखूं या हार के बादॅ मिली सच्चाई लिखूं. . जो खो गया उसका अफसोस लिखूं याजो बूचा है, उसमें भी कोई रोशनी लिखूं टूटकर फिर से जुड़ने की बात लिखूं बिखरकर भी मुस्कुराने की औकात लिखूं . या - ShareChat