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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📝 अधूरे अल्फाज़ #✍️ अनसुनी शायरी #📜मेरी कलम से✒️
✍️ साहित्य एवं शायरी - उम्र बीत जाती है लोगों को करते हुए छल कभी अपनों से कभी सपनों से कभी दुःख में कभी सुख में मौत सारे छल का भरम एक बार में ही तोड देती है साहिब। # Neehaj khishna duivedi] उम्र बीत जाती है लोगों को करते हुए छल कभी अपनों से कभी सपनों से कभी दुःख में कभी सुख में मौत सारे छल का भरम एक बार में ही तोड देती है साहिब। # Neehaj khishna duivedi] - ShareChat