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#🥵हाय गर्मी🫠🚤
🥵हाय गर्मी🫠🚤 - 'बे वजह घर से निकलने की जरूरत क्या है॰ 'मौत से आँखे मिलाने की जरूरत क्या है॰ सब को मालूम है बाहर की हवा है क़ातिल " यूँही क़ातिल से उलझने की ज़रूरत क्या है" 'ज़िन्दगी एक नेमत है उसे सम्भाल के रखो॰ को सजाने की ज़रूरत क्या है॰ क़ब्रगाहों 'दिल बहलाने के लिये घर में वजह हैं काफ़ी " यूँही गलियों में भटकने की ज़रूरत क्या है" 0](55|? बाहर गर्मी बढ रही है इसलिए घर से निकलने के पहले Gulzar जी के इस कविता के एक बार जरूर पढ़़े. 'बे वजह घर से निकलने की जरूरत क्या है॰ 'मौत से आँखे मिलाने की जरूरत क्या है॰ सब को मालूम है बाहर की हवा है क़ातिल " यूँही क़ातिल से उलझने की ज़रूरत क्या है" 'ज़िन्दगी एक नेमत है उसे सम्भाल के रखो॰ को सजाने की ज़रूरत क्या है॰ क़ब्रगाहों 'दिल बहलाने के लिये घर में वजह हैं काफ़ी " यूँही गलियों में भटकने की ज़रूरत क्या है" 0](55|? बाहर गर्मी बढ रही है इसलिए घर से निकलने के पहले Gulzar जी के इस कविता के एक बार जरूर पढ़़े. - ShareChat