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#✍ મારી રચના #😊 પ્રામાણિકતાના કોટ્સ 📚 #☺ જીવનની વાસ્તવિક્તા #☺ જીવનની વાસ્તવિક્તા #🤗 સંઘર્ષથી સફળતા #👌 જીવનની શીખ
✍ મારી રચના - कहानीः "किसान और सूखा हुआ पेड़' "एक गाँव में राघव नाम का किसान रहता था। उसके खेत के बीचों बीच एक बड़ा आम का पेड़ था। वह पेड़ उसे बहुत प्रिय था क्योंकि बचपन से उसने उसकी देखभाल की थी। एक वर्ष भयंकर गर्मी पड़ी। धीरे धीरे पेड़ सूखने लगा। कुछ ही महीनों में उसकी सारी पत्तियाँ झड़ गई। राघव बहुत दुखी हो गया। वह रोज़ उस पेड़ को देखकर सोचता, 'भगवान ने मेरे साथ ऐँसा क्यों किया? मेरा सबसे प्रिय पेड़ ही क्यों सूख? गाँव के लोग भी कहते , 'यह बहुत बुरा हुआ। '  अर्थ तुरंत लेकिन राघव के दादाजी ने उससे कहा, बेटा, धैर्य रखो। हर घटना का समझ नहीं आता।' कुछ महीनों बाद बारिश का मौसम आया। एक दिन तेज़ आँधी चली और उसी सूखे पेड़ की एक बड़ी शाखा टूटकर गिर गई। शाखा के नीचे जमीन में एक पुराना घड़बा हुआ समय के चाँदी के सिक्के भरे हुए थे। था। जब राघव ने उसे निकाला, तो उसमें पुराने राघव आश्चर्यचकित रह गया। जिस पेड़ के सूखने पर वह रो रहा था, वही उसके जीवन में नई खुशियाँ लेकर आया था। पेड़ सूखा " दादाजी मुस्कुराए और बोले , 'देखा था तब तुम्हें केवल नुकसान बेटा, ভান दिखाई दिया। लेकिन ईश्वर की योजना उससे कहीं बड़ी थी।' राघव ने सिर झुकाकर कहा, 'अब मैं समझ गया कि हर घटना का परिणाम तुरंत दिखाई नहीं देता। ' পীকৃষ্যা ' तब दादाजी ने का संदेश समझायाः 'जीवन में जो भी होता है, उसका अर्थ उसी समय समझ नहीं आता। कई बार कठिनाइयाँ हमें उस रास्ते पर ले जाती हैं जहाँ हमारा वास्तविक कल्याण छिपा होता है। इसलिए दुख के समय धैर्य रखो, कर्म करते रहो और ईश्वर पर विश्वास बनाए रखो।' भगवद्वीता का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को अपने कर्तव्य पर ध्यान देना चाहिए और परिस्थितियों से टूटना नहीं चाहिए। कठिन भी आगे चलकर सीख, शक्ति सकनु भहैव नए अवसर बन सीख  तुम्हें दुख दे रही है, संभव है वही कल सबसे बड़ी शक्ति बन आज जो घटना तुम्हारी  जाए। इसलिए परिस्थिति नहीं, अपने विश्वास और कर्म को मजबूत बनाओ।"  कहानीः "किसान और सूखा हुआ पेड़' "एक गाँव में राघव नाम का किसान रहता था। उसके खेत के बीचों बीच एक बड़ा आम का पेड़ था। वह पेड़ उसे बहुत प्रिय था क्योंकि बचपन से उसने उसकी देखभाल की थी। एक वर्ष भयंकर गर्मी पड़ी। धीरे धीरे पेड़ सूखने लगा। कुछ ही महीनों में उसकी सारी पत्तियाँ झड़ गई। राघव बहुत दुखी हो गया। वह रोज़ उस पेड़ को देखकर सोचता, 'भगवान ने मेरे साथ ऐँसा क्यों किया? मेरा सबसे प्रिय पेड़ ही क्यों सूख? गाँव के लोग भी कहते , 'यह बहुत बुरा हुआ। '  अर्थ तुरंत लेकिन राघव के दादाजी ने उससे कहा, बेटा, धैर्य रखो। हर घटना का समझ नहीं आता।' कुछ महीनों बाद बारिश का मौसम आया। एक दिन तेज़ आँधी चली और उसी सूखे पेड़ की एक बड़ी शाखा टूटकर गिर गई। शाखा के नीचे जमीन में एक पुराना घड़बा हुआ समय के चाँदी के सिक्के भरे हुए थे। था। जब राघव ने उसे निकाला, तो उसमें पुराने राघव आश्चर्यचकित रह गया। जिस पेड़ के सूखने पर वह रो रहा था, वही उसके जीवन में नई खुशियाँ लेकर आया था। पेड़ सूखा " दादाजी मुस्कुराए और बोले , 'देखा था तब तुम्हें केवल नुकसान बेटा, ভান दिखाई दिया। लेकिन ईश्वर की योजना उससे कहीं बड़ी थी।' राघव ने सिर झुकाकर कहा, 'अब मैं समझ गया कि हर घटना का परिणाम तुरंत दिखाई नहीं देता। ' পীকৃষ্যা ' तब दादाजी ने का संदेश समझायाः 'जीवन में जो भी होता है, उसका अर्थ उसी समय समझ नहीं आता। कई बार कठिनाइयाँ हमें उस रास्ते पर ले जाती हैं जहाँ हमारा वास्तविक कल्याण छिपा होता है। इसलिए दुख के समय धैर्य रखो, कर्म करते रहो और ईश्वर पर विश्वास बनाए रखो।' भगवद्वीता का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को अपने कर्तव्य पर ध्यान देना चाहिए और परिस्थितियों से टूटना नहीं चाहिए। कठिन भी आगे चलकर सीख, शक्ति सकनु भहैव नए अवसर बन सीख  तुम्हें दुख दे रही है, संभव है वही कल सबसे बड़ी शक्ति बन आज जो घटना तुम्हारी  जाए। इसलिए परिस्थिति नहीं, अपने विश्वास और कर्म को मजबूत बनाओ।" - ShareChat