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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - की विशेषता क्या होती है? एक शब्द में कहें - अर्थात ट्रस्टी ி का किसी में मोह नहीं होता; क्यों? क्योंकि मेरापन नष्टोमोहा। ट्रस्टी नहीं है। मेरे में मोह जाता है। जो भी प्रवृत्ति के अर्थ साधन मिले हुए हैं वा सेवा के अर्थ सम्बन्ध होता है, उसमें मेरापन नहीं लेकिन बापनदादा का दिया हुआ अमानत समझकर सेवा करेंगे वा साधनों को कार्य में সথান স-পন সসাদ लगाएंगे तो सहज ही எண்I ट्रस्टी ؟٤ निकले ऐसी स्थिति है? या जिन साधनों 3iR aTaT-aTqT గేౌ मुख से को कार्य में लगाते हो उसमें मेरापन का भान है? मेरापन है तो देहभान आता है। अगर तन के भी ट्रस्टी है तो देह का भान हो नहीं सकता। সন স সন্স पहला वायदा क्या किया? जो मेरा सो बाप का। চু3া নী मरजीवा हो गए ना? फिर मेरापन कहां से आया? दी हुई चीज़ कभी वापिस नहीं ली जाती। तो सदा देही अभिमानी बनने का अर्थात् नष्टोमोहा बनने का सहज साधन क्या हुआ? ट्रस्टी हूँ, मैं ट्रस्टी हूँ। Avyakt Hurli - 22-06-77 की विशेषता क्या होती है? एक शब्द में कहें - अर्थात ट्रस्टी ி का किसी में मोह नहीं होता; क्यों? क्योंकि मेरापन नष्टोमोहा। ट्रस्टी नहीं है। मेरे में मोह जाता है। जो भी प्रवृत्ति के अर्थ साधन मिले हुए हैं वा सेवा के अर्थ सम्बन्ध होता है, उसमें मेरापन नहीं लेकिन बापनदादा का दिया हुआ अमानत समझकर सेवा करेंगे वा साधनों को कार्य में সথান স-পন সসাদ लगाएंगे तो सहज ही எண்I ट्रस्टी ؟٤ निकले ऐसी स्थिति है? या जिन साधनों 3iR aTaT-aTqT గేౌ मुख से को कार्य में लगाते हो उसमें मेरापन का भान है? मेरापन है तो देहभान आता है। अगर तन के भी ट्रस्टी है तो देह का भान हो नहीं सकता। সন স সন্স पहला वायदा क्या किया? जो मेरा सो बाप का। চু3া নী मरजीवा हो गए ना? फिर मेरापन कहां से आया? दी हुई चीज़ कभी वापिस नहीं ली जाती। तो सदा देही अभिमानी बनने का अर्थात् नष्टोमोहा बनने का सहज साधन क्या हुआ? ट्रस्टी हूँ, मैं ट्रस्टी हूँ। Avyakt Hurli - 22-06-77 - ShareChat