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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #📖 कविता और कोट्स✒️ #📖Whatsapp शायरी
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - मेरी फितरत में नहीं था तमाशा करना , बहुत कुछ जानते थे मगर ख़ामोश रहे॰! मेरी फितरत में नहीं था तमाशा करना , बहुत कुछ जानते थे मगर ख़ामोश रहे॰! - ShareChat