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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - जो मिल न सका उसका इंतज़ार क्यों है, दिल को अभी तक उससे प्यार क्यों है। वो छोड़ गया राह में तन्हा करके, आँखों में फिर उसका ख़ुमार क्यों है। जिसने कभी लौटकर देखा भी नहीं, उसके लिए दिल बेकरार क्यों है। हर रोज़ नया ज़ख्म मिला है उसकी यादों से, फिर भी ये दर्द दिल को स्वीकार क्यों है। में खुश 7 वो किसी और की दुनिया  है शायद , मेरे हिस्से में मगर ये हार क्यों है। जिसे भूलने की दुआ रोज़ करते हैं, लबों पर उसी का नाम बार-बार क्यों है। जो मिल रहा है उसे अपनाने से डरते हैं , बीती मोहब्बत का इतना असर क्यों है। जो मिल न सका उसका इंतज़ार क्यों है, दिल को अभी तक उससे प्यार क्यों है। प्रकाश पंडित जो मिल न सका उसका इंतज़ार क्यों है, दिल को अभी तक उससे प्यार क्यों है। वो छोड़ गया राह में तन्हा करके, आँखों में फिर उसका ख़ुमार क्यों है। जिसने कभी लौटकर देखा भी नहीं, उसके लिए दिल बेकरार क्यों है। हर रोज़ नया ज़ख्म मिला है उसकी यादों से, फिर भी ये दर्द दिल को स्वीकार क्यों है। में खुश 7 वो किसी और की दुनिया  है शायद , मेरे हिस्से में मगर ये हार क्यों है। जिसे भूलने की दुआ रोज़ करते हैं, लबों पर उसी का नाम बार-बार क्यों है। जो मिल रहा है उसे अपनाने से डरते हैं , बीती मोहब्बत का इतना असर क्यों है। जो मिल न सका उसका इंतज़ार क्यों है, दिल को अभी तक उससे प्यार क्यों है। प्रकाश पंडित - ShareChat