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✈Last travel memories😎 - मुजफ्फरपुर बुधवार २७ मई २०२६ | १७ प्रधान शिक्षिका के प्रयास से स्कूल में लगा चापाकल बच्चों के भविष्य को और बेहतर बनाने में मदद मिली मास्करन्यूत | झंझारपुर  जब मैँने योगदान दिया था॰ तब बच्चों के लिए पीने तक॰का पानी नर्ह्ी था। नन्हें बच्चे प्यास के साथ पढ़ाई करने को मजबूर थे।" यह है   झंझारपुर   प्रखंड   के कहना प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर 380 Coravesh की प्रधान शिक्षिका   मुत्री कुमारो का। उनके संकल्प ओर लगातार संघर्ष ने आज विद्यालय की तस्वीर बदल दी है। अब स्कूल परिसर में गया   है अपना लग चापाकल स्कूल में लगा चापाकल।  जिससे बच्चों को स्वच्छ पेयजल मिल रह्य है। मुत्री कुमारे ने बताया  आवेदन दिए और लंबे समय तक कि जब उन्होने प्रधान शिक्षिका के इंतजार व संघर्ष किया। आखिरकार रूप में विद्यालय में योगदान दिया, सफल  हुआ   और उनका   प्रयास उस समय स्कूल परिसर में पीने के विद्यालय परिसर में चापाकल लग पानी की कोई व्यवस्था नर्हीॅ थी। गया। इस उपलब्धि पर मुत्री कुमारी विद्यालय से दूर एक सार्वजनिक ने कहा, " यह सिर्फ एक चापाकल नर्ही बल्कि मेरे संघर्ष धैर्य और आम   लोग जहा चापाकल था बच्चों को पानी लेने में  परेशान बच्चों के प्रति समर्पण की जीत है। करते थे। कई बार बच्चों को पानी की बच्चो # विद्यालय अब भरने से मना भी कर दिया जाता मुस्कान के साथ स्वच्छ जल था। ऐसे में छोटे छोटे बच्चे प्यासे धारा भी बहेगी। " उन्होंने कह्य कि ही कक्षा में बैठने को मजबूर हो अब  उन्हॅ संतोष है कि॰ उनके जाते थे। उन्होने बताया कि तभी छोटे से प्रयास से बच्चों के भविष्य उन्होंने संकल्प लिया कि विद्यालय को थोड़ा और बेहतर बनाने ्में में बच्चों को सभी मूलभूत सुविधाएं मदद   मिली है। उनके   अनुसार उपलब्ध करानी ्है। इसी उद्देश्य से "सच्ची शिक्षा वही हैे जहां बच्चों उन्होंने लगातार प्रयास शुरू किया। की हर मूलभूत आवश्यकता का कई कार्यालयों के चक्कर लगाए भी घ्यान रखा जाए। " मुजफ्फरपुर बुधवार २७ मई २०२६ | १७ प्रधान शिक्षिका के प्रयास से स्कूल में लगा चापाकल बच्चों के भविष्य को और बेहतर बनाने में मदद मिली मास्करन्यूत | झंझारपुर  जब मैँने योगदान दिया था॰ तब बच्चों के लिए पीने तक॰का पानी नर्ह्ी था। नन्हें बच्चे प्यास के साथ पढ़ाई करने को मजबूर थे।" यह है   झंझारपुर   प्रखंड   के कहना प्राथमिक विद्यालय मोहनपुर 380 Coravesh की प्रधान शिक्षिका   मुत्री कुमारो का। उनके संकल्प ओर लगातार संघर्ष ने आज विद्यालय की तस्वीर बदल दी है। अब स्कूल परिसर में गया   है अपना लग चापाकल स्कूल में लगा चापाकल।  जिससे बच्चों को स्वच्छ पेयजल मिल रह्य है। मुत्री कुमारे ने बताया  आवेदन दिए और लंबे समय तक कि जब उन्होने प्रधान शिक्षिका के इंतजार व संघर्ष किया। आखिरकार रूप में विद्यालय में योगदान दिया, सफल  हुआ   और उनका   प्रयास उस समय स्कूल परिसर में पीने के विद्यालय परिसर में चापाकल लग पानी की कोई व्यवस्था नर्हीॅ थी। गया। इस उपलब्धि पर मुत्री कुमारी विद्यालय से दूर एक सार्वजनिक ने कहा, " यह सिर्फ एक चापाकल नर्ही बल्कि मेरे संघर्ष धैर्य और आम   लोग जहा चापाकल था बच्चों को पानी लेने में  परेशान बच्चों के प्रति समर्पण की जीत है। करते थे। कई बार बच्चों को पानी की बच्चो # विद्यालय अब भरने से मना भी कर दिया जाता मुस्कान के साथ स्वच्छ जल था। ऐसे में छोटे छोटे बच्चे प्यासे धारा भी बहेगी। " उन्होंने कह्य कि ही कक्षा में बैठने को मजबूर हो अब  उन्हॅ संतोष है कि॰ उनके जाते थे। उन्होने बताया कि तभी छोटे से प्रयास से बच्चों के भविष्य उन्होंने संकल्प लिया कि विद्यालय को थोड़ा और बेहतर बनाने ्में में बच्चों को सभी मूलभूत सुविधाएं मदद   मिली है। उनके   अनुसार उपलब्ध करानी ्है। इसी उद्देश्य से "सच्ची शिक्षा वही हैे जहां बच्चों उन्होंने लगातार प्रयास शुरू किया। की हर मूलभूत आवश्यकता का कई कार्यालयों के चक्कर लगाए भी घ्यान रखा जाए। " - ShareChat