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#❤️जीवन की सीख #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - सोचती हूँ कभी कभी क्या ज़िंदगी बस ऐसे ही चलती रहेगी.. सुबह बिना किसी उत्साह के आती हैं और शाम थकान ओढ़कर चली जाती हैं। भीड में भी अकेली हूँ, और अकेले पन में भी खुद से लड़ती हूँ। हँसी चेहरे पर रखती हूँ, पर सवाल दिल में दबे रहते हैं। लोग समझते हैं मैं मज़बूत हूँ, शायद इसलिए मेरे टूटने पर कोई ध्यान नहीं देता। सपने आँखों में आज भी जिंदा हैं, पर हौसले अक्सर डर के आगे हार जाते हैं। खुद को खो देने के डर से किसी को पास आने नहीं देती। हर किसी से कह देती हूँ - "सब ठीक है", क्योंकि अपनी किसे समझाऊँ , उलझनें ` कैसे समझाऊँ? सोचती हूँ कभी कभी क्या ज़िंदगी बस ऐसे ही चलती रहेगी.. सुबह बिना किसी उत्साह के आती हैं और शाम थकान ओढ़कर चली जाती हैं। भीड में भी अकेली हूँ, और अकेले पन में भी खुद से लड़ती हूँ। हँसी चेहरे पर रखती हूँ, पर सवाल दिल में दबे रहते हैं। लोग समझते हैं मैं मज़बूत हूँ, शायद इसलिए मेरे टूटने पर कोई ध्यान नहीं देता। सपने आँखों में आज भी जिंदा हैं, पर हौसले अक्सर डर के आगे हार जाते हैं। खुद को खो देने के डर से किसी को पास आने नहीं देती। हर किसी से कह देती हूँ - "सब ठीक है", क्योंकि अपनी किसे समझाऊँ , उलझनें ` कैसे समझाऊँ? - ShareChat