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#हर दिन #दिवसः #हरपल
हर दिन - 5 غم सिख गौख और शर्य के प्रतीक सिह बाबा नस्सा रामगढ़िया जी की जयंती पर उन्हें हमारा विनम्र बंदन सिंह बहादुर की Jassa Singh Ramgarhiaः बाबा बंदा शहादत के बाद सिखों को न सिर्फ स्थानीय मुगल साम्राज्य के सूबेदारों के विरुद्ध जंग लड़नी पड़ी, बल्कि नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के भी संघर्ष নিতল पडा। ऐसे कष्टदायक हालात करना सिखों की बागडोर महान सिख जत्थेदारों के हाथ में रही। १८वीं शताब्दी के अनुपम वीर, आदर्श आचरण और पवित्र सिख   योद्धाओं சி विचारधारा के HET बड़ा एक महत्वपूर्ण  और उल्लेखनीय 8, सिख नाम महान ٢٩٤ सिपहसालार सरदार जस्सा হাসাঠিমা কূাI Family of devotees and sacrifices %ETJ %al बलिदानी परिचार 5 मई॰ १७२३ को लाहौर इनका GFT के समीप गांच ईछोगिल (ईचोगिल) में हुआ था। इनके  পুনত काफी घर की सेवा में थे। इनके दादा भाई समय से गुरु हरदास सिंह दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के हजूरी सिंहों में से एक थे, जो समय तक गुरु साहिब के साथ 4 रहे। बंदा सिंह बहादुर के पंजाब भाई हरदास பIT आगमन पर सिंह बाबा जी की फौज में शामिल हो गए और अनेक युद्ध लड़े। अंततः आप बजवाड़े के निकट शहीद होे गए। आपके पिता सरदार भगवान सिंह भी उच्च आचरण वाले सिख थे। 3=17 ಖ अनेक 5. 3 और 1738 ಶತ सन वजीराबाद के निकट नादिर शाह के लश्कर के साथ लड़ते हुए शहीद हो गए। 5 غم सिख गौख और शर्य के प्रतीक सिह बाबा नस्सा रामगढ़िया जी की जयंती पर उन्हें हमारा विनम्र बंदन सिंह बहादुर की Jassa Singh Ramgarhiaः बाबा बंदा शहादत के बाद सिखों को न सिर्फ स्थानीय मुगल साम्राज्य के सूबेदारों के विरुद्ध जंग लड़नी पड़ी, बल्कि नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के भी संघर्ष নিতল पडा। ऐसे कष्टदायक हालात करना सिखों की बागडोर महान सिख जत्थेदारों के हाथ में रही। १८वीं शताब्दी के अनुपम वीर, आदर्श आचरण और पवित्र सिख   योद्धाओं சி विचारधारा के HET बड़ा एक महत्वपूर्ण  और उल्लेखनीय 8, सिख नाम महान ٢٩٤ सिपहसालार सरदार जस्सा হাসাঠিমা কূাI Family of devotees and sacrifices %ETJ %al बलिदानी परिचार 5 मई॰ १७२३ को लाहौर इनका GFT के समीप गांच ईछोगिल (ईचोगिल) में हुआ था। इनके  পুনত काफी घर की सेवा में थे। इनके दादा भाई समय से गुरु हरदास सिंह दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के हजूरी सिंहों में से एक थे, जो समय तक गुरु साहिब के साथ 4 रहे। बंदा सिंह बहादुर के पंजाब भाई हरदास பIT आगमन पर सिंह बाबा जी की फौज में शामिल हो गए और अनेक युद्ध लड़े। अंततः आप बजवाड़े के निकट शहीद होे गए। आपके पिता सरदार भगवान सिंह भी उच्च आचरण वाले सिख थे। 3=17 ಖ अनेक 5. 3 और 1738 ಶತ सन वजीराबाद के निकट नादिर शाह के लश्कर के साथ लड़ते हुए शहीद हो गए। - ShareChat