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#📚कविता-कहानी संग्रह #heart touching #💔दर्द भरी कहानियां
📚कविता-कहानी संग्रह - न चाहकर कर भी उसे दिल में रख्खा गया, एक दर के आदमी को दरबदर रख्खा गया। जान भी पाये नहीं क्या थी खता आखिर मेरी , बेस्बब ही जेल में मुझको रख्खा गया। T में हर फूल था qT मुरझा गया मौसम खुश्क में, हर कली को ओस से ही तरबतर रख्खा गया। हरकतें हैं आदमी की यहां कौन जान पाया, नाम इनका फिर भी देखो उम्दा बशर रख्खा गया। इक सियासतदान ने कहा कुछ लोग से, राज सारे खोल दूंगा जेल में गर रखखा गया। न चाहकर कर भी उसे दिल में रख्खा गया, एक दर के आदमी को दरबदर रख्खा गया। जान भी पाये नहीं क्या थी खता आखिर मेरी , बेस्बब ही जेल में मुझको रख्खा गया। T में हर फूल था qT मुरझा गया मौसम खुश्क में, हर कली को ओस से ही तरबतर रख्खा गया। हरकतें हैं आदमी की यहां कौन जान पाया, नाम इनका फिर भी देखो उम्दा बशर रख्खा गया। इक सियासतदान ने कहा कुछ लोग से, राज सारे खोल दूंगा जेल में गर रखखा गया। - ShareChat