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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #एक रचना रोज़✍ #💚 लाइफ़ की शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - खामोश उदासी चुकी हैं आँखें अब मुस्कान सजाते सजाते, झूठी থব্ধ थक गया है ये दिल अपनों से अपनी ही बात छुपाते छुपाते। एक अजीब सा शोर है इस गहरी खामोशी में, जैसे कोई कुछ कह रहा हो, इस तन्हाई की मदहोशी में। भीड़ तो बहुत है शहर में॰ पर हम खुद को अकेला पाते हैं, यादें, रह-रह कर बहुत सताते हैं। 4 दिन, वो पुरानी पुराने क्यों आज जी भर के रोने का मन करता है? क्यों बेमतलब साये दिल डरने का दम भरता है? शायद ये उदासी भी कोई नया सबब लाएगी, को फिर से जोड़ बिखरे हुए इन टुकड़ों जाएगी| कलम उठाई है तो दर्द भी कागज़ पर उतार दूँगी, अपनी इस तन्हाई को मैं खुद ही संवार दूँगी। आज words truel खामोश उदासी चुकी हैं आँखें अब मुस्कान सजाते सजाते, झूठी থব্ধ थक गया है ये दिल अपनों से अपनी ही बात छुपाते छुपाते। एक अजीब सा शोर है इस गहरी खामोशी में, जैसे कोई कुछ कह रहा हो, इस तन्हाई की मदहोशी में। भीड़ तो बहुत है शहर में॰ पर हम खुद को अकेला पाते हैं, यादें, रह-रह कर बहुत सताते हैं। 4 दिन, वो पुरानी पुराने क्यों आज जी भर के रोने का मन करता है? क्यों बेमतलब साये दिल डरने का दम भरता है? शायद ये उदासी भी कोई नया सबब लाएगी, को फिर से जोड़ बिखरे हुए इन टुकड़ों जाएगी| कलम उठाई है तो दर्द भी कागज़ पर उतार दूँगी, अपनी इस तन्हाई को मैं खुद ही संवार दूँगी। आज words truel - ShareChat