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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - चुप रहा मैं उसकी नादानी पर, मुस्कुराया उसकी हैरानी पर। वो समझता रहा कि जीत गया, हार बैठा वो अपनी ला-फ़ानी पर। मैंने लफ़्ज़ों को ख़र्च ही न किया, रहम आता था उसकी नादानी पर। ज़ैद , दुनिया ये क्या समझेगी भला, है रूह-ए-इन्सानी पर। गुज़रती I एक ज़रा ग़फ़लत हुई और पीठ में खंजर लगा.. आज हम को दोस्तों की दोस्ती से डर लगा. ا LessLesH चुप रहा मैं उसकी नादानी पर, मुस्कुराया उसकी हैरानी पर। वो समझता रहा कि जीत गया, हार बैठा वो अपनी ला-फ़ानी पर। मैंने लफ़्ज़ों को ख़र्च ही न किया, रहम आता था उसकी नादानी पर। ज़ैद , दुनिया ये क्या समझेगी भला, है रूह-ए-इन्सानी पर। गुज़रती I एक ज़रा ग़फ़लत हुई और पीठ में खंजर लगा.. आज हम को दोस्तों की दोस्ती से डर लगा. ا LessLesH - ShareChat