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#कबीर #विश्वमेंशांति_भाईचारा_कैसेहो . आत्मा आत्मा जब शरीर छोड़ती है तो मनुष्य को पहले ही पता चल जाता है। कुछेक यमराज के गण भाला लेकर आये हैऔर उसके शरीर पर चुभता है ताकि शरीर आत्मा छोड दे। ऐसे में वह स्वयं भी हथियार डाल देता है। अन्यथा उसने आत्मा को शरीर में बनाये रखने का भरसक प्रयत्न किया होता है। और इस चक्कर में कष्ट झेला होता है। उधर आत्मा शरीर से निकलने की तैयारी कर रही होती है इसलिये शरीर के पाँच प्राण एक 'धनंजय प्राण' को छोड़कर शरीर से बाहर निकलना आरम्भ कर देते हैं । ये प्राण, आत्मा से पहले बाहर निकलकर आत्मा के लिये सूक्ष्म-शरीर का निर्माण करते हैं जो कि शरीर छोड़ने के बाद आत्मा का वाहन होता है । धनंजय प्राण पर सवार होकर आत्मा शरीर से निकलकर इसी सूक्ष्म-शरीर में प्रवेश कर जाती है । बहरहाल अभी आत्मा शरीर में ही होती है और दूसरे प्राण धीरे-धीरे शरीर से बाहर निकल रहे होते हैं कि व्यक्ति को पता चल जाता है । उसे बेचैनी होने लगती है, घबराहट होने लगती है । सारा शरीर फटने लगता है, खून की गति धीमी होने लगती है । सांँस उखड़ने लगती है । बाहर के द्वार बंद होने लगते हैं । अर्थात् अब चेतना लुप्त होने लगती है और मूर्च्छा आने लगती है । चैतन्य ही आत्मा के होने का संकेत है और जब आत्मा ही शरीर छोड़ने को तैयार है तो चेतना को तो जाना ही है और वो मूर्छित होने लगता है। बुद्धि समाप्त हो जाती है और किसी अनजाने लोक में प्रवेश की अनुभूति होने लगती है। यह चौथा आयाम होता है । फिर मूर्च्छा आ जाती है और आत्मा एक झटके से किसी भी खुली हुई इंद्रिय से बाहर निकल जाती है। इसी समय चेहरा विकृत हो जाता है। यही आत्मा के शरीर छोड़ देने का मुख्य चिह्न होता है। शरीर छोड़ने से पहले केवल कुछ पलों के लिये आत्मा अपनी शक्ति से शरीर को शत-प्रतिशत सजीव करती है। ताकि उसके निकलने का मार्ग अवरुद्ध न रहे। और फिर उसी समय आत्मा निकल जाती है और शरीर खाली मकान की तरह निर्जीव रह जाता है। इससे पहले घर के आसपास कुत्ते-बिल्ली के रोने की आवाजें आती हैं । इन पशुओं की आँखे अत्याधिक चमकीली होती है जिससे ये रात के अँधेरे में तो क्या सूक्ष्म-शरीर धारी आत्माओं को भी देख लेते हैं। जब किसी व्यक्ति की आत्मा शरीर छोड़ने को तैयार होती है तो उसके अपने सगे-संबंधी जो भूत अवस्था मे उसके आस पास होते है वे मृतात्माओं के रूप में होते है उसे लेने आते हैं और व्यक्ति उन्हें यमदूत समझता है और कुत्ते-बिल्ली उन्हें साधारण जीवित मनुष्य ही समझते हैं। और अनजान होने की वजह से उन्हें देखकर रोते हैं और कभी-कभी भौंकते भी हैं । शरीर के पाँच प्रकार के प्राण बाहर निकलकर उसी तरह सूक्ष्म-शरीर का निर्माण करते हैं । जैसे गर्भ में स्थूल-शरीर का निर्माण क्रम से होता है। सूक्ष्म-शरीर का निर्माण होते ही आत्मा अपने मूल वाहक धनंजय प्राण के द्वारा बड़े वेग से निकलकर सूक्ष्म-शरीर में प्रवेश कर जाती है । आत्मा शरीर के जिस अंग से निकलती है उसे खोलती, तोड़ती हुई निकलती है। जो लोग भयंकर पापी होते है उनकी आत्मा मूत्र या मल-मार्ग से निकलती है। जो पापी भी हैं और पुण्यात्मा भी हैं उनकी आत्मा मुख से निकलती है। जो पापी कम और पुण्यात्मा अधिक है उनकी आत्मा नेत्रों से निकलती है और जो पूर्ण धर्मनिष्ठ हैं, पुण्यात्मा और योगी पुरुष हैं उनकी आत्मा ब्रह्मरंध्र से निकलती है । अब तक शरीर से बाहर सूक्ष्म-शरीर का निर्माण हुआ रहता है। लेकिन ये सभी का नहीं हुआ रहता। जो लोग अपने जीवन में ही मोहमाया से मुक्त हो चुके योगी पुरुष है उन्ही के लिये तुरंत सूक्ष्म-शरीर का निर्माण हो पाता है। अन्यथा जो लोग मोहमाया से ग्रस्त हैं परंतु बुद्धिमान हैं, ज्ञान-विज्ञान से अथवा पांडित्य से युक्त हैं, ऐसे लोगों के लिये दस दिनों में सूक्ष्म शरीर का निर्माण हो पाता है। उसको यमराज धर्मराय के दरबार में ले जाते हैं। धर्मराय इसके कर्मो का लेखा-जोखा करता है। अब उसके सामने उसके सारे जीवन की यात्रा चलचित्र की तरह चल रही होती है । मृत्यु के समय हमारी क्या सोच होती है जानिए 👇👇👇 https://youtu.be/hYEdFzRgsyA?si=vb8Jb3VcueOCpyId मृत्यु के बाद का सफर कैसा होता है आइए जानते हैं 👇👇👇 https://youtu.be/XdtesAWMmRM?si=CepPzRZ5i0_tEKnC Supreme Sant Rampal Ji
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