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#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - कम ही लोग होते ्हें साहब जज्बातों को বাল समझने शायद इन्सलिए ही शायरों की बस्तियाँ नर्हीं होती.. ! ! कम ही लोग होते ्हें साहब जज्बातों को समझने शायद इन्सलिए ही शायरों की बस्तियाँ नर्हीं होती.. ! ! - ShareChat