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#अहीर चंदन यादव ग्रुप
अहीर चंदन यादव ग्रुप - २४ लाख में एक माँ की कीमत तय हुई, २४ लाख में एक बच्चे का भी गया। कभी जो ज़िंदगी अनमोल थी॰ वो हिसाब हो कागज़ों   में आज मुआवज़ा बनकर रह गई। जबलपुर की उन लहरों ने फिर एक कड़वा सच दिखा दिया यहाँ इंसान नहीं, बस आंकड़े गिने जाते हैं। जब पानी ने उन्हें घेरा, तो माँ ने अपने बच्चे को और कसकर पकड़ लिया। एक ही लाइफ जैकेट थी, एक ही उम्मीद, और उसी उम्मीद में दोनों ने खुद को सौंप दिया। वो पकड़ सिर्फ डर नहीं थी, वो आखिरी सांस निभाई गई माँ की ममता थी। तक जिंदगियाँ यूँ ही लहरों में समा गई॰ चीखें भी शायद पानी के 15 ज्यादा शोर में दब गई। सवाल खड़े हैं लापरवाही के, सिस्टम के॰ जिंम्मेदारी के। आवाज़ें | ল্কিন তনান उन   लोगों आज भी कहीं खोए हुए हैं, पहले भी हादसे हुए, शहर बदलते गए, नाम बदलते गए, पर कहानियाँ वही रहीं। हर बार कुछ लोग रोए, कुछ दिन खबरें चलीं, फिर सब बन चुका है इस देश में। खामोश हो गया। जैसे दर्द भी अब आदत समझेगा ये देश कि एक जान की कीमत किसी रकम से नहीं होती ? कत जिंम्मेदारी जो हर हादसे के बाद सो जाती हैं? ये सवाल जागेगी कच आज भी हवा में तैर रहा हैं और हम बस इंतज़ार कर रहे हैं, एक बदलाव  का । २४ लाख में एक माँ की कीमत तय हुई, २४ लाख में एक बच्चे का भी गया। कभी जो ज़िंदगी अनमोल थी॰ वो हिसाब हो कागज़ों   में आज मुआवज़ा बनकर रह गई। जबलपुर की उन लहरों ने फिर एक कड़वा सच दिखा दिया यहाँ इंसान नहीं, बस आंकड़े गिने जाते हैं। जब पानी ने उन्हें घेरा, तो माँ ने अपने बच्चे को और कसकर पकड़ लिया। एक ही लाइफ जैकेट थी, एक ही उम्मीद, और उसी उम्मीद में दोनों ने खुद को सौंप दिया। वो पकड़ सिर्फ डर नहीं थी, वो आखिरी सांस निभाई गई माँ की ममता थी। तक जिंदगियाँ यूँ ही लहरों में समा गई॰ चीखें भी शायद पानी के 15 ज्यादा शोर में दब गई। सवाल खड़े हैं लापरवाही के, सिस्टम के॰ जिंम्मेदारी के। आवाज़ें | ল্কিন তনান उन   लोगों आज भी कहीं खोए हुए हैं, पहले भी हादसे हुए, शहर बदलते गए, नाम बदलते गए, पर कहानियाँ वही रहीं। हर बार कुछ लोग रोए, कुछ दिन खबरें चलीं, फिर सब बन चुका है इस देश में। खामोश हो गया। जैसे दर्द भी अब आदत समझेगा ये देश कि एक जान की कीमत किसी रकम से नहीं होती ? कत जिंम्मेदारी जो हर हादसे के बाद सो जाती हैं? ये सवाल जागेगी कच आज भी हवा में तैर रहा हैं और हम बस इंतज़ार कर रहे हैं, एक बदलाव  का । - ShareChat