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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - तेरे वो नूरानी चेहरे वाली तस्वीर कहाँ से लाऊँ, ऐसी तक़दीर कहाँ से लाऊँ। हर पल तेरे साथ  ঘুড়ই  तेरी यादों की ख़ामोशी में भी एक शोर सा बसता है, शोर में छुपी हुई मेरी तासीर कहाँ से लाऊँ।  उस फिर भी दिल के सबसे करीब सा लगता है గ్ెడ్డౌగ్గే इतनी नज़दीकी वाली कोई तदबीर कहाँ से लाऊँ। हर सुबह तेरा ही नाम मेरी साँसों में उतर आता है, उस नाम से जुड़ी हुई कोई जागीर कहाँ से लाऊँ।  आँखों में तेरे ख़्वाबों का एक समुंदर सा ठहरा है, उस समुंदर की कोई तस्वीर कहाँ से लाऊँ। दूसरी इश्क़ के रास्ते पर बस तेरा ही साया चलता है, साये से अलग कोई नई कहाँ से लाऊँ। तहरीर उस चुपके से दिल हर रोज़ तुझे ही पुकारता रहता है, उस पुकार की कोई अधूरी तासीर कहाँ से लाऊँ। आख़िरी दुआ में भी बस तेरा ही नाम शामिल है, उस दुआ से बाहर कोई और तक़दीर कहाँ से लाऊँ। लिखितः प्रकाश पंडित तेरे वो नूरानी चेहरे वाली तस्वीर कहाँ से लाऊँ, ऐसी तक़दीर कहाँ से लाऊँ। हर पल तेरे साथ  ঘুড়ই  तेरी यादों की ख़ामोशी में भी एक शोर सा बसता है, शोर में छुपी हुई मेरी तासीर कहाँ से लाऊँ।  उस फिर भी दिल के सबसे करीब सा लगता है గ్ెడ్డౌగ్గే इतनी नज़दीकी वाली कोई तदबीर कहाँ से लाऊँ। हर सुबह तेरा ही नाम मेरी साँसों में उतर आता है, उस नाम से जुड़ी हुई कोई जागीर कहाँ से लाऊँ।  आँखों में तेरे ख़्वाबों का एक समुंदर सा ठहरा है, उस समुंदर की कोई तस्वीर कहाँ से लाऊँ। दूसरी इश्क़ के रास्ते पर बस तेरा ही साया चलता है, साये से अलग कोई नई कहाँ से लाऊँ। तहरीर उस चुपके से दिल हर रोज़ तुझे ही पुकारता रहता है, उस पुकार की कोई अधूरी तासीर कहाँ से लाऊँ। आख़िरी दुआ में भी बस तेरा ही नाम शामिल है, उस दुआ से बाहर कोई और तक़दीर कहाँ से लाऊँ। लिखितः प्रकाश पंडित - ShareChat