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#💝 शायराना इश्क़ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👌 अच्छी सोच👍
💝 शायराना इश्क़ - @अंज़ुम रहबख मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था वो उतनी गया जितना क़रीब था ٤5} मैं उस को देखने को तरसती ही रह गई जिस शख़्स की हथेली पे मेरा नसीब था बस्ती के सारे लोग ही आतिशनपरस्त थे घर जल रहा था और समुंदर क़रीब था मरियम कहाँ तलाश करे अपने ख़ून को हर शख़्स के गले में निशान-ए-सलीब था चाँदी की क़ब्र में दफ़ना दिया गया ತಞ मैं जिस को थी वो लड़का ग़रीब था चाहती @अंज़ुम रहबख मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था वो उतनी गया जितना क़रीब था ٤5} मैं उस को देखने को तरसती ही रह गई जिस शख़्स की हथेली पे मेरा नसीब था बस्ती के सारे लोग ही आतिशनपरस्त थे घर जल रहा था और समुंदर क़रीब था मरियम कहाँ तलाश करे अपने ख़ून को हर शख़्स के गले में निशान-ए-सलीब था चाँदी की क़ब्र में दफ़ना दिया गया ತಞ मैं जिस को थी वो लड़का ग़रीब था चाहती - ShareChat