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#🖋ग़ालिब की शायरी #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #🌙रात की शायरी✍ #👍स्पेशल शायरी🖋 #📒 मेरी डायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - ShareChat Cr i मिर्ज़ा ग़ालिब दुआ मांगी थी आशियाने की चल पड़ी आंधी ज़माने की ग़ालिब मेरा दर्द कोई नही समझ पाया क्योंके मुझे आदत थी मुस्कराने की Ghand urifc1-67 ShareChat Cr i मिर्ज़ा ग़ालिब दुआ मांगी थी आशियाने की चल पड़ी आंधी ज़माने की ग़ालिब मेरा दर्द कोई नही समझ पाया क्योंके मुझे आदत थी मुस्कराने की Ghand urifc1-67 - ShareChat