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#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #☝आज का ज्ञान
❤️जीवन की सीख - एक घर है,किसी का और उसमे आठ दस लोग रहते हो,और घर बटा हो दो ग्रुपो मेंँ,और ये दोनों ग्रुप एक दूसरो की ना मानते हो,और ना एक को समझते दूसरो ತಕೈ; और ना ही एक प्रति आदर सम्मान हो, दुसरे के की सुख दुःख की चिंता हो, না ক্িমী ব্ধী বৃব্ধ दुसरे सब अपने अपने अहंकार के कारण सब अपने आप में महान हो। और अचानक घर में लग जाये आग, किसी एक हो,बहुत ज्यादा, ग्रुप वाले के कमरे में और समान जल रहा ग्रुप वाले भी उस आग पर पानी डालने लगे और फिर दुसरे आकर अच्छी बात है ये तो,लेकिन एक दिक्क़त है,ना कि पदार्थो वस्तुओ सामान को जलने से तो आप रोक देते के,लेकिन आपके ही घर में रिश्तो में जो आग ೯ಗಗಹ दूसरो लगी होती है,उसमें आप पानी नहीं डालते ऐसा क्यूं? में रखा समान क्या इंसान से ज्यादा कीमती है क्या?्और कोई घर अगर चाहे भी घर में लगी रिश्तो में आग को बुझाने तो इनको वो दुश्मन दिखता है वस्तुओं में लगी आग में पानी डालने को सब तैयार है,लेकिन रिश्तो में लगी आग में सब पानी नहीं घी डालते है,या फिर आग लगने देते है॰ये बोलकर की ये है ही ऐसे। किस किस को समझाये, ऐसा कोई नहीं है,कि समझ नहीं सकता, सब समझ सकते है,लेकिन एक मान्यता बना ली है,मन में की वो नहीं समझेंगे, ये कहना आसान है,समझाने में मेहनत लगती है,खतरा है,कही उल्टा में ही दुश्मन ना बन जाऊ इनकी आग की लपटे मुझे ना जला दे,पागल वो अपने है,और किसी के घर में आग लगी हो, में अगर थोड़ी बहुत आग की उसको बुझाने लपटे, लग भी जाये तो क्या हुआ,आग बूझ जाये,ये ठीक है,या मुझे लापटे ना लगे ये ठीक है? एक घर है,किसी का और उसमे आठ दस लोग रहते हो,और घर बटा हो दो ग्रुपो मेंँ,और ये दोनों ग्रुप एक दूसरो की ना मानते हो,और ना एक को समझते दूसरो ತಕೈ; और ना ही एक प्रति आदर सम्मान हो, दुसरे के की सुख दुःख की चिंता हो, না ক্িমী ব্ধী বৃব্ধ दुसरे सब अपने अपने अहंकार के कारण सब अपने आप में महान हो। और अचानक घर में लग जाये आग, किसी एक हो,बहुत ज्यादा, ग्रुप वाले के कमरे में और समान जल रहा ग्रुप वाले भी उस आग पर पानी डालने लगे और फिर दुसरे आकर अच्छी बात है ये तो,लेकिन एक दिक्क़त है,ना कि पदार्थो वस्तुओ सामान को जलने से तो आप रोक देते के,लेकिन आपके ही घर में रिश्तो में जो आग ೯ಗಗಹ दूसरो लगी होती है,उसमें आप पानी नहीं डालते ऐसा क्यूं? में रखा समान क्या इंसान से ज्यादा कीमती है क्या?्और कोई घर अगर चाहे भी घर में लगी रिश्तो में आग को बुझाने तो इनको वो दुश्मन दिखता है वस्तुओं में लगी आग में पानी डालने को सब तैयार है,लेकिन रिश्तो में लगी आग में सब पानी नहीं घी डालते है,या फिर आग लगने देते है॰ये बोलकर की ये है ही ऐसे। किस किस को समझाये, ऐसा कोई नहीं है,कि समझ नहीं सकता, सब समझ सकते है,लेकिन एक मान्यता बना ली है,मन में की वो नहीं समझेंगे, ये कहना आसान है,समझाने में मेहनत लगती है,खतरा है,कही उल्टा में ही दुश्मन ना बन जाऊ इनकी आग की लपटे मुझे ना जला दे,पागल वो अपने है,और किसी के घर में आग लगी हो, में अगर थोड़ी बहुत आग की उसको बुझाने लपटे, लग भी जाये तो क्या हुआ,आग बूझ जाये,ये ठीक है,या मुझे लापटे ना लगे ये ठीक है? - ShareChat