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🔱 महाशिव पुराण – अध्याय 29 | शिव मार्ग का अगला रहस्य | #mahasivpuran
mahasivpuran - महाशिव पुराण उनतीसवों अध्याय शिव कूपा का अनुभव होने के बाद, भीतर पूर्ण समर्पण का মাখক ক भाव जाग उठता है। अब वह अपने हर कर्म का फल महादेव को अर्पित कर देता है। महादेव कहते "जो अपने कर्म मुझे समर्पित कर देता है, उसे संसार का कोई न सफलता उसे गर्व देती है, भय नहीं सताता| न असफलता उसे निराश करती है। साधक अब केवल अपने लिए नहीं, sia ಹ बल्क समस्त লিব ' कल्याण के ' जीने लगता है। उसकी वाणी से शांति, उसके कमीं से प्रेम , तब उसे ज्ञात होता है कि और उसके जीवन से सच्ची मुक्ति मुत्यु के बाद नहीं, शिवत्व की सुगंध रहते हुए शिव में बल्कि जीयित फैलने लगती है। पूर्ण समर्पण से प्राप्त होती है। यही है शिव में पूर्ण समर्पण का दिव्य मार्ग। महाशिव पुराण उनतीसवों अध्याय शिव कूपा का अनुभव होने के बाद, भीतर पूर्ण समर्पण का মাখক ক भाव जाग उठता है। अब वह अपने हर कर्म का फल महादेव को अर्पित कर देता है। महादेव कहते "जो अपने कर्म मुझे समर्पित कर देता है, उसे संसार का कोई न सफलता उसे गर्व देती है, भय नहीं सताता| न असफलता उसे निराश करती है। साधक अब केवल अपने लिए नहीं, sia ಹ बल्क समस्त লিব ' कल्याण के ' जीने लगता है। उसकी वाणी से शांति, उसके कमीं से प्रेम , तब उसे ज्ञात होता है कि और उसके जीवन से सच्ची मुक्ति मुत्यु के बाद नहीं, शिवत्व की सुगंध रहते हुए शिव में बल्कि जीयित फैलने लगती है। पूर्ण समर्पण से प्राप्त होती है। यही है शिव में पूर्ण समर्पण का दिव्य मार्ग। - ShareChat