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#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - बीमारी इक काम तो अच्छा कर देती है यारों को कुछ देर इकट्ठा कर देती है हर सूरत से मरने का दिन ख़ास है लेकिन मौत इसे भी आम तमाशा कर देती है रंग भरो अपने हिस्से के और मर जाओ दीमक हर तस्वीर को पूरा कर देती है एक कदम दहलीज़ के बाहर रखता हूँ मैं और हवा रफ़्तार ज़्यादा कर देती है मुद्दत से शाम ढले ही याद R इक आ जाती है और सवेरा कर देती है मोहब्बत जितनी वो करता है इतनी मुझसे इतनी मोहब्बत मुश्किल पैदा कर देती है इश्क़ करो आराम नहीं आए तो कहना ये बीमारी सब को अच्छा कर देती है रूठे तो इक लफ़्ज़ नहीं कहती है मुँह से बस खाने में नमक ज़्यादा कर देती है! ! बीमारी इक काम तो अच्छा कर देती है यारों को कुछ देर इकट्ठा कर देती है हर सूरत से मरने का दिन ख़ास है लेकिन मौत इसे भी आम तमाशा कर देती है रंग भरो अपने हिस्से के और मर जाओ दीमक हर तस्वीर को पूरा कर देती है एक कदम दहलीज़ के बाहर रखता हूँ मैं और हवा रफ़्तार ज़्यादा कर देती है मुद्दत से शाम ढले ही याद R इक आ जाती है और सवेरा कर देती है मोहब्बत जितनी वो करता है इतनी मुझसे इतनी मोहब्बत मुश्किल पैदा कर देती है इश्क़ करो आराम नहीं आए तो कहना ये बीमारी सब को अच्छा कर देती है रूठे तो इक लफ़्ज़ नहीं कहती है मुँह से बस खाने में नमक ज़्यादा कर देती है! ! - ShareChat