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#✍गुलजारांचे साहित्य #🖋शेरो-शायरी #🙏प्रेरणादायक / सुविचार #✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍गुलजारांचे साहित्य - बैठे, हम झूठों के बीच सच बोल ` और हम वो नमक का शहर था जखम खोल बैठे . . ! बैठे, हम झूठों के बीच सच बोल ` और हम वो नमक का शहर था जखम खोल बैठे . . ! - ShareChat