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#संत श्री आशारामजी बापू #📿संतवाणी 🗣️ ##भक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻🌸आध्यात्मिक बाते😇
संत श्री आशारामजी बापू - ७ अप्रेल ভম যাস তী কী स्वामी लीलाशाह वाणी प्रसन्नता और अप्रसन्नता मन की प्रसन्नता और अप्रसन्नता का आधार अनुकुलता और प्रतिकूलता पर है | जब कोई चीज  मन के अनुकुल है तब मन का झुकाव उस ओर 7 होता है और मन की एकता होती है तथा मन स्थिर लिए  होता है | अतः उस विषय में कुछ समय के सुख भासता है | अनुकुल वस्तु की प्राप्ति होने से चित्त मैं जो लहरें उठती हैं वह वास्तव में उस महान् आनन्द 7 रूप चेतन की छाया है | वह सच्चा आनन्द नहीं है | ही मन मलीन हो जाता है सुनते अशुद्ध वचन | अतः किसी विकार को कम न समझो | सदैव विकार से सौ कोस दूर रहो ७ अप्रेल ভম যাস তী কী स्वामी लीलाशाह वाणी प्रसन्नता और अप्रसन्नता मन की प्रसन्नता और अप्रसन्नता का आधार अनुकुलता और प्रतिकूलता पर है | जब कोई चीज  मन के अनुकुल है तब मन का झुकाव उस ओर 7 होता है और मन की एकता होती है तथा मन स्थिर लिए  होता है | अतः उस विषय में कुछ समय के सुख भासता है | अनुकुल वस्तु की प्राप्ति होने से चित्त मैं जो लहरें उठती हैं वह वास्तव में उस महान् आनन्द 7 रूप चेतन की छाया है | वह सच्चा आनन्द नहीं है | ही मन मलीन हो जाता है सुनते अशुद्ध वचन | अतः किसी विकार को कम न समझो | सदैव विकार से सौ कोस दूर रहो - ShareChat