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✍️ साहित्य एवं शायरी - ৫৫ समाज अक्सर पूछ लेता है - 'हाथों की चूड़ियाँ कहाँ है? बिछिया क्यों नर्हीं पहनी- यह तो सुहाग की निशानी है। TR पूछना भूल जाता है  जिसकी यह निशानी है उसके साथ तुम खुश भी हा या नरही। ৫৫ समाज अक्सर पूछ लेता है - 'हाथों की चूड़ियाँ कहाँ है? बिछिया क्यों नर्हीं पहनी- यह तो सुहाग की निशानी है। TR पूछना भूल जाता है  जिसकी यह निशानी है उसके साथ तुम खुश भी हा या नरही। - ShareChat