कौवे चलें हंस की चाल
जमाने तेरी बलिहारी
कांटों पर चलते मृगछौने
श्वानों को मखमली बिछौने
सोन चिरैया आंसू पीती
गिद्ध उड़ाएं माल
जमाने तेरी बलिहारी
अपने देश की आजादी के
ये देखो हथकंडे
चोर उचक्के चुनरी ले गए
अंगिया ले गए गुंडे
तफ्तीश मां घांघरिया
ले गए कोतवाल
जमाने तेरी बलिहारी
(किसी समय लखीमपुर कवि सम्मेलन के प्रमुख चेहरे ,कवि🙏 स्व.रमेश रंजन मिश्र🙏 की ये पंक्तियां आज भी उसी तरह से प्रासंगिक ) #apna Lmp #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य

