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#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - A1 Writer भटक गए हम राहों में मंजिल का ठिकाना नहीं था ले गई जिंदगी उन राहों में जहाँ हमें जाना नहीं था कुछ क़िस्मत की मेहरबानी कुछ हमारा कसूर था हमने खो दिया सब कुछ वहां जहाँ कुछ पाना नहीं था A1 Writer भटक गए हम राहों में मंजिल का ठिकाना नहीं था ले गई जिंदगी उन राहों में जहाँ हमें जाना नहीं था कुछ क़िस्मत की मेहरबानी कुछ हमारा कसूर था हमने खो दिया सब कुछ वहां जहाँ कुछ पाना नहीं था - ShareChat