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#Jesus#@Christ#@ #सत्य वचन #reasoning
Jesus#@Christ#@ - परमेश्वर की इच्छा 1 को कैसे जाने?ू  परमेश्वर की इच्छा एक रहरस्य नहीं, जीवन-प्रक्रिया है बल्क एक जहों मन, चचन और आत्मा धीरे-्धीरे एक दिशा में संरेखित होते हैं वचन के द्वारा (Bible से मार्गदर्शन) মতন মরিনা 119:105  परमेश्वर की इच्छा जानने का पहला और सबसे स्पष्ट साधन है तेरा वचन मेरे पांच के लिए दीपक परमेश्वर का वचन | जो बातें वचन के चिरद्द्ध हैं, और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है।"  वे परमेश्वर की इच्छा नहीं हो सकती | प्रार्थना और पवित्र आत्मा 2 रोमियों   8:१४ के मार्गदर्शन से "जो परमेश्वर की आत्मा के द्वारा जब आप शांत मन से प्रार्थना करते हैं चलाए जाते है॰ वही परमेश्वर  पवित्र आत्मा अंदर से सही दिशा का 4981" साक्षी (आंदरूनी पुष्टिा ) देता है।  3 मन का नया होना (परिवर्तन ) रोमियों १२:२ "अपने मन के नए हो जाने से स्पांतररित जब सोच बदलती है, होते जाओ, जिससे तुम परमेश्वर  भी बदलती है।  নন মপত की भली , भावती और सिद्ध इच्छा को पहचान सको। * परिस्थितियों और द्वारों के द्वारा 4 कभी-कभी परमेश्वर दरवाज़े खोलता नीतिवचन १६:९ और बंद करता है। मनुष्य का मन उसके मार्ग की योजना बनाता  > जो रास्ता बार-बार बंद हो रहा है परत्तु यहोता उसके कदमों को निर्दशित करता है।" वह संकेत हा सकता है कि दिशा  चाहिए। बदलनी 5 आत्मिक सलाह (आत्मिक सलाह ) नीतिवचन ११:१४ "जहों उचित मनणा नहीं परिपवव विश्वरनाियें या सेवकों की सलाह चहों लोग गिर पडते हैँ; परन्तु बहत से  भी मार्गदर्शन देती है। सलाहकारों से कुशलता होती है।" 61 भीतर की शांति (अंदर की शांति ) फिलस्पियों ३:१५ सही निर्गाय में अक्सर गहरी शांति होती है, मसीह की शांति तुम्हारे हदय में राज्य करे , उसी के लिये तुम बुलाए  भले ही रास्ता कठिन क्यों न हो। गए भी होः और धन्यवाद करो। " परमेश्वर की इच्छा कोई छुपी हुई पहेली नहीं , HR बल्कि एक ऐसा मार्ग है जो वचन , प्रार्थना और शांति से धीरे ्धीरे स्पष्ट होता है। उस पर भरोसा रखो, वह तुम्हारे सब मागों में सीधा करेगा | নীনিববন 3:5-6 परमेश्वर की इच्छा 1 को कैसे जाने?ू  परमेश्वर की इच्छा एक रहरस्य नहीं, जीवन-प्रक्रिया है बल्क एक जहों मन, चचन और आत्मा धीरे-्धीरे एक दिशा में संरेखित होते हैं वचन के द्वारा (Bible से मार्गदर्शन) মতন মরিনা 119:105  परमेश्वर की इच्छा जानने का पहला और सबसे स्पष्ट साधन है तेरा वचन मेरे पांच के लिए दीपक परमेश्वर का वचन | जो बातें वचन के चिरद्द्ध हैं, और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है।"  वे परमेश्वर की इच्छा नहीं हो सकती | प्रार्थना और पवित्र आत्मा 2 रोमियों   8:१४ के मार्गदर्शन से "जो परमेश्वर की आत्मा के द्वारा जब आप शांत मन से प्रार्थना करते हैं चलाए जाते है॰ वही परमेश्वर  पवित्र आत्मा अंदर से सही दिशा का 4981" साक्षी (आंदरूनी पुष्टिा ) देता है।  3 मन का नया होना (परिवर्तन ) रोमियों १२:२ "अपने मन के नए हो जाने से स्पांतररित जब सोच बदलती है, होते जाओ, जिससे तुम परमेश्वर  भी बदलती है।  নন মপত की भली , भावती और सिद्ध इच्छा को पहचान सको। * परिस्थितियों और द्वारों के द्वारा 4 कभी-कभी परमेश्वर दरवाज़े खोलता नीतिवचन १६:९ और बंद करता है। मनुष्य का मन उसके मार्ग की योजना बनाता  > जो रास्ता बार-बार बंद हो रहा है परत्तु यहोता उसके कदमों को निर्दशित करता है।" वह संकेत हा सकता है कि दिशा  चाहिए। बदलनी 5 आत्मिक सलाह (आत्मिक सलाह ) नीतिवचन ११:१४ "जहों उचित मनणा नहीं परिपवव विश्वरनाियें या सेवकों की सलाह चहों लोग गिर पडते हैँ; परन्तु बहत से  भी मार्गदर्शन देती है। सलाहकारों से कुशलता होती है।" 61 भीतर की शांति (अंदर की शांति ) फिलस्पियों ३:१५ सही निर्गाय में अक्सर गहरी शांति होती है, मसीह की शांति तुम्हारे हदय में राज्य करे , उसी के लिये तुम बुलाए  भले ही रास्ता कठिन क्यों न हो। गए भी होः और धन्यवाद करो। " परमेश्वर की इच्छा कोई छुपी हुई पहेली नहीं , HR बल्कि एक ऐसा मार्ग है जो वचन , प्रार्थना और शांति से धीरे ्धीरे स्पष्ट होता है। उस पर भरोसा रखो, वह तुम्हारे सब मागों में सीधा करेगा | নীনিববন 3:5-6 - ShareChat