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फेसबुक पेज को अधिक से अधिक फॉलो करें जी 🙏 सत साहेब जी 🙏 श्रृष्टि रचना कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार। तीनो देवा शाखा है, पात रुप संसार।। श्रीमद्धभागवत गीता, अध्याय 15, श्लोक 1 ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् । छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ॥ भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष की जड़ ऊपर (परमात्मा में) है और शाखाएँ नीचे फैली हुई हैं। इसके पत्ते वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को जान लेता है, वही वास्तविक ज्ञान (वेदों का सार) जानने वाला तत्वदर्शी संत होता है। #SaintRampalJiMaharaj #KabirisGod #spirituality #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #✝यीशु वचन #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏कर्म क्या है❓
❤️जीवन की सीख - सृष्टि रचना जगतगुरु तत्वदशी संत रामपाल जी महाराज श्रीमदभागवत गीते अध्याय १५, श्लोक कबीर साहेब की वाणी ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं अक्षर पुरूष एक पेड़ है, प्राहुरव्ययम् निरंजन वाकी डार। छन्दांसि यस्य पर्णानि तीनो देवा शाखा है, यस्तं वेद स वेदवित् Il पात रूप संसार।। भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ ( पीपल ) वृक्ष  की जड़ ऊपर (परमात्मा में) है और যুঃস '5 (3ಚ) नीचे फैली हुई हैं। इसके पत्ते शाखाए कबीर साहेब वेद वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को (परम अक्षर पुर्य ) लेता है, वही वास्ततिक ज्ञान जान (वेदों का सार ) जानने वाला तत्वदर्शी संत होता हैं। HI श्रीमद्भगवद अक्षर पुरूष गीता यथारप शरीदमातत ीता ाक्षापव तगीता शमदशावदा ीता शाख शाखा 2 'rl ब्रह्मा जी विष्णु ; शिव जी  सूष्टि क कर्ता ) ( संहारकती ) (पालनक्ता  वाणी और गीता का अंतर्सम्बंध कबीर साहेब की वाणी और गीता का यह " श्रोमदभगवद श्लाक दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं कि यह संसार एक उल्टा लटका हुआ वृक्ष है॰ जिसकी जड़ परम अक्षर पुरूष " कबीर साहेब हैं॰ तना अक्षर पुरुष, uId (ud) तीन शाखाऐं न्रिदेव है और  रुप संसार इसके पत्ते यह सम्पूर्ण संसार है। vila-viq, wala, | जो इस रहस्य को जानता ह॰ HH বচী মন্সা तत्वदर्शी संत সানী  नानव जीवन, भोतिक जगत  और मोक्ष का अधिकारी होता है। voice of saints सृष्टि रचना जगतगुरु तत्वदशी संत रामपाल जी महाराज श्रीमदभागवत गीते अध्याय १५, श्लोक कबीर साहेब की वाणी ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं अक्षर पुरूष एक पेड़ है, प्राहुरव्ययम् निरंजन वाकी डार। छन्दांसि यस्य पर्णानि तीनो देवा शाखा है, यस्तं वेद स वेदवित् Il पात रूप संसार।। भावार्थः इस संसार रूपी अश्वत्थ ( पीपल ) वृक्ष  की जड़ ऊपर (परमात्मा में) है और যুঃস '5 (3ಚ) नीचे फैली हुई हैं। इसके पत्ते शाखाए कबीर साहेब वेद वेद हैं। जो इस वृक्ष के स्वरूप को (परम अक्षर पुर्य ) लेता है, वही वास्ततिक ज्ञान जान (वेदों का सार ) जानने वाला तत्वदर्शी संत होता हैं। HI श्रीमद्भगवद अक्षर पुरूष गीता यथारप शरीदमातत ीता ाक्षापव तगीता शमदशावदा ीता शाख शाखा 2 'rl ब्रह्मा जी विष्णु ; शिव जी  सूष्टि क कर्ता ) ( संहारकती ) (पालनक्ता  वाणी और गीता का अंतर्सम्बंध कबीर साहेब की वाणी और गीता का यह " श्रोमदभगवद श्लाक दोनों एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं कि यह संसार एक उल्टा लटका हुआ वृक्ष है॰ जिसकी जड़ परम अक्षर पुरूष " कबीर साहेब हैं॰ तना अक्षर पुरुष, uId (ud) तीन शाखाऐं न्रिदेव है और  रुप संसार इसके पत्ते यह सम्पूर्ण संसार है। vila-viq, wala, | जो इस रहस्य को जानता ह॰ HH বচী মন্সা तत्वदर्शी संत সানী  नानव जीवन, भोतिक जगत  और मोक्ष का अधिकारी होता है। voice of saints - ShareChat