आज पावन मोहिनी एकादशी का दिव्य दिन है, जो भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना जाता है। पुराणों में वर्णित है कि भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत प्रदान किया था। यह तिथि उसी दिव्य लीला की स्मृति में मनाई जाती है, जो धर्म, बुद्धि और मायाशक्ति की अद्भुत अभिव्यक्ति है।
ऐसा विश्वास है कि आज के दिन पृथ्वी पर सूक्ष्म रूप से अमृतमयी ऊर्जा का संचार होता है, जो साधक के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है।
आज प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद श्रद्धा-भाव से भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें पवित्र तुलसी के पत्ते अर्पित करें, क्योंकि तुलसी अर्पण के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है।
यदि संभव हो तो आज व्रत अवश्य रखें। दिनभर सात्विकता बनाए रखें, बाहरी भोजन से बचें और मन, वचन तथा कर्म की शुद्धि का विशेष ध्यान रखें। व्रत के दौरान अल्पाहार लिया जा सकता है।
आज दिनभर इस दिव्य मंत्र का जप करने से विशेष पुण्य और कृपा प्राप्त होती है—
“ॐ नमो भगवती मोहिनी एकादश्यै नमः”
यह मंत्र साधक के जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
रात्रि में भी यथासंभव भजन, ध्यान और जप करते हुए जागरण करना अत्यंत शुभ माना गया है। यह साधना भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है।
आज का दिन केवल व्रत का नहीं, अपितु आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति के माध्यम से जीवन को दिव्यता की ओर ले जाने का एक दुर्लभ अवसर है। 🙏
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