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#☕ सुबह की चाय
☕ सुबह की चाय - गर्मी में झुलसती तन जिस तरह ले कर ठंडे दरिया में डुबकियाँ नसीब होती है, राहत को दिल ऐसा ही इत्मीनान होता है पढ   कर! को 3= # नज्म तेरी 2 है ज़िन्दगी के दरिया लगता तारी लगा के निकले हैं एक कैसी निहाल होती है! रूह लिये $ आप बाबा गर्मी में झुलसती तन जिस तरह ले कर ठंडे दरिया में डुबकियाँ नसीब होती है, राहत को दिल ऐसा ही इत्मीनान होता है पढ   कर! को 3= # नज्म तेरी 2 है ज़िन्दगी के दरिया लगता तारी लगा के निकले हैं एक कैसी निहाल होती है! रूह लिये $ आप बाबा - ShareChat