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#जीवन की सीख
जीवन की सीख - चुकी हूँ मैं॰ ४थक ना किसी से दूर जा रही हूँ, ना किसी के पास रह पा रही हूँ, ये कैसी जंग है अंदर, जिसमें हर रोज़ खुद से हार रही हूँ । ना दर्द पूरा कम होता है, आँसू खुलकर गिरते हैं, 7 कुछ ज़ख्म ऐसे भी होते हैं, जो बस इंसान को ख़ामोश करते हैं। ना दिल अब ಕ್ಕ UT पहले ना ये दुनिया वैसी लगती मैं वही हूँ शायद. बस अब खुद में नहीं बसती हूँl चुकी हूँ मैं॰ ४थक ना किसी से दूर जा रही हूँ, ना किसी के पास रह पा रही हूँ, ये कैसी जंग है अंदर, जिसमें हर रोज़ खुद से हार रही हूँ । ना दर्द पूरा कम होता है, आँसू खुलकर गिरते हैं, 7 कुछ ज़ख्म ऐसे भी होते हैं, जो बस इंसान को ख़ामोश करते हैं। ना दिल अब ಕ್ಕ UT पहले ना ये दुनिया वैसी लगती मैं वही हूँ शायद. बस अब खुद में नहीं बसती हूँl - ShareChat